यह घटना केवल एक हादसा नहीं बल्कि लंबे समय से चली आ रही लापरवाही का नतीजा मानी जा रही है। ग्रामीणों का कहना है कि गांव की सड़क से तेज रफ्तार में गुजरने वाले वाहनों को लेकर कई बार प्रशासन को चेताया गया था। विशेष रूप से फैक्ट्री की बसों की रफ्तार पर लगाम लगाने और गांव में स्पीड ब्रेकर बनाने की मांग बार बार उठाई गई थी लेकिन हर बार इसे नजरअंदाज कर दिया गया। इस अनदेखी ने आखिरकार एक युवक की जान ले ली और अब ग्रामीणों का धैर्य टूट गया।
हादसे के बाद गुस्साए ग्रामीण बड़ी संख्या में सड़क पर उतर आए और उन्होंने चक्का जाम कर दिया। लोगों ने जोरदार नारेबाजी करते हुए प्रशासन के खिलाफ अपना आक्रोश जाहिर किया। उनका साफ कहना था कि यदि समय रहते स्पीड ब्रेकर बनाए गए होते तो शायद यह हादसा टल सकता था। प्रदर्शन के चलते इलाके में यातायात पूरी तरह ठप हो गया और सड़क के दोनों ओर वाहनों की लंबी कतारें लग गईं।
ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि फैक्ट्री की बसें अक्सर लापरवाही से और तेज रफ्तार में गांव के भीतर से गुजरती हैं जिससे हर समय दुर्घटना का खतरा बना रहता है। इसके बावजूद न तो कोई गति नियंत्रण के उपाय किए गए और न ही सुरक्षा के अन्य इंतजाम किए गए। लोगों का कहना है कि प्रशासन केवल घटनाओं के बाद सक्रिय होता है जबकि पहले से चेतावनी देने के बावजूद कोई कदम नहीं उठाया जाता।
घटना की सूचना मिलते ही किशनगंज थाना पुलिस मौके पर पहुंची और हालात को काबू में करने की कोशिश की। पुलिस ने ग्रामीणों को समझाने का प्रयास किया और यातायात बहाल कराने की दिशा में कदम उठाए। साथ ही मृतक के शव को पोस्टमार्टम के लिए अस्पताल भेजा गया और पूरे मामले की जांच शुरू कर दी गई है।
यह हादसा एक बार फिर यह सवाल खड़ा करता है कि क्या प्रशासन किसी बड़ी घटना का इंतजार करता है या फिर समय रहते जरूरी कदम उठाए जाएंगे। एक जान जाने के बाद अब गांव के लोग ठोस कार्रवाई की मांग कर रहे हैं ताकि भविष्य में ऐसी दर्दनाक घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो सके।
