मौसम केंद्र भोपाल ने रविवार को 15 जिलों में बारिश की संभावना जताई है। अगले 24 घंटे के दौरान नीमच, मंदसौर, श्योपुर, शिवपुरी, गुना, अशोकनगर, निवाड़ी, टीकमगढ़, छतरपुर, पन्ना, मऊगंज, सीधी, सिंगरौली, सिवनी और बालाघाट में बारिश हो सकती है।
दो चक्रवाती परिसंचरण से बदला मौसम
मौसम विभाग के मुताबिक, प्रदेश के पश्चिमी और उत्तरी हिस्सों में सक्रिय चक्रवाती परिसंचरण के कारण मौसम में बदलाव आया है। इसके असर से इंदौर, उज्जैन, ग्वालियर, चंबल और जबलपुर संभाग के जिलों में बादल छाए रहने और बारिश की गतिविधियां देखने को मिल रही हैं।
शुक्रवार और शनिवार को भी इन संभागों के कई इलाकों में बारिश दर्ज की गई। बड़वानी जिले के सेंधवा, सीहोर और पीथमपुर में पानी गिरा, जबकि रीवा और सागर संभाग के जिलों में बादल छाए रहे। मौसम में आए इस बदलाव के चलते तापमान में गिरावट आई है।
20 अक्टूबर के बाद रात में बढ़ेगी ठंडक
मौसम विभाग के अनुसार, 18 और 19 अक्टूबर को प्रदेश के कुछ जिलों में आंधी-बारिश का दौर जारी रह सकता है। इसके बाद बारिश की गतिविधियों में कमी आने की संभावना है। विभाग के पूर्वानुमान के मुताबिक, 20 अक्टूबर के बाद रात के तापमान में गिरावट के साथ ठंडक बढ़ सकती है।
मानसून विदा, फिर भी सक्रिय हैं मौसमी सिस्टम
मध्य प्रदेश से इस साल 3 अक्टूबर को मानसून की विदाई हो गई थी। इसके बावजूद सक्रिय मौसमी प्रणालियों के कारण बारिश का एक और दौर शुरू हो गया है। पिछले एक सप्ताह से पूर्वी और पश्चिमी मध्य प्रदेश के कई जिलों में आंधी-बारिश का असर दिखाई दे रहा है।
मौसम विशेषज्ञ शैलेंद्र कुमार नायक के मुताबिक, पिछले 10 वर्षों के आंकड़ों में अक्टूबर के दौरान बारिश, गर्मी और ठंड तीनों तरह की मौसमी परिस्थितियां देखने को मिलती हैं। इस बार भी ऐसा ही मौसम बना हुआ है। अक्टूबर की शुरुआत में आसमान साफ होने और धूप निकलने से गर्मी का अहसास हुआ था, लेकिन रात में ठंडक के साथ अब कई जिलों में बारिश भी हो रही है। इस साल प्रदेश में दक्षिण-पश्चिम मानसून करीब 100 दिनों तक सक्रिय रहा।
पूर्वी हिस्से में 4% ज्यादा, पश्चिमी मध्य प्रदेश में कम बारिश
मानसून के दौरान प्रदेश में बारिश का वितरण एक जैसा नहीं रहा। पूर्वी मध्य प्रदेश के जबलपुर, रीवा, सागर और शहडोल संभाग में सामान्य से 4 प्रतिशत अधिक बारिश दर्ज की गई। हालांकि, बालाघाट, छिंदवाड़ा, दमोह, जबलपुर, नरसिंहपुर, पांढुर्णा, रीवा, सागर और सिवनी में सामान्य से 5 से 21 प्रतिशत तक कम पानी गिरा।
वहीं, पश्चिमी मध्य प्रदेश के आलीराजपुर, अशोकनगर, बड़वानी, बैतूल, देवास, धार, हरदा, इंदौर, झाबुआ, खंडवा, मंदसौर, मुरैना, नर्मदापुरम, नीमच, रायसेन, रतलाम, सीहोर, शाजापुर, उज्जैन और विदिशा में औसत से 9 से 51 प्रतिशत तक कम बारिश दर्ज की गई।
25 जिलों में बारिश का कोटा पूरा
प्रदेश के 25 जिलों में मानसून के दौरान बारिश का निर्धारित कोटा पूरा हो चुका है। इनमें भोपाल, राजगढ़, बुरहानपुर, खरगोन, कटनी, मंडला, डिंडौरी, ग्वालियर, गुना, दतिया, पन्ना, छतरपुर, टीकमगढ़, निवाड़ी, मैहर, आगर-मालवा, भिंड, श्योपुर, सिंगरौली, सीधी, सतना, मऊगंज, शहडोल, उमरिया और अनूपपुर शामिल हैं।
इसके उलट, 30 जिलों में सामान्य से कम बारिश हुई। इनमें नरसिंहपुर, दमोह, बालाघाट, अशोकनगर, मुरैना, मंदसौर, खंडवा, बड़वानी, नीमच, जबलपुर, रीवा, सागर, देवास, सिवनी, सीहोर, शिवपुरी, रायसेन, छिंदवाड़ा, विदिशा, शाजापुर, पांढुर्णा, इंदौर, उज्जैन, बैतूल, हरदा, नर्मदापुरम, रतलाम, झाबुआ, धार और आलीराजपुर शामिल हैं।
मानसून की विदाई के बाद भी बारिश की गतिविधियां जारी रहने से प्रदेश में दिन के तापमान में गिरावट आई है। अब अगले कुछ दिनों में बारिश का असर कम होने और रात के समय ठंड बढ़ने की संभावना जताई जा रही है।
