शिवपुरी/करैरा। करैरा न्यायालय परिसर में अधिवक्ताओं ने एसडीएम अनुपम शर्मा के कथित कार्यव्यवहार और संवाद शैली को लेकर कड़ी नाराजगी व्यक्त करते हुए उनके विरुद्ध निंदा प्रस्ताव पारित किया। अधिवक्ताओं का आरोप है कि एसडीएम का व्यवहार प्रशासनिक पद की गरिमा के अनुरूप नहीं है, जिससे न्यायिक एवं प्रशासनिक कार्यों के दौरान अनावश्यक असहज स्थिति उत्पन्न हो रही है।
वरिष्ठ अधिवक्ताओं के अनुसार, हाल ही में एक संवेदनशील प्रकरण की सुनवाई के दौरान तत्काल हस्तक्षेप का अनुरोध किए जाने पर एसडीएम ने कथित रूप से कहा, “लोग मरते हैं तो उन्हें मरने दो, पुलिस है कायमी करने के लिए।” अधिवक्ताओं का कहना है कि यदि यह कथन किया गया है, तो यह न केवल मानवीय संवेदनाओं के विपरीत है, बल्कि एक जिम्मेदार प्रशासनिक अधिकारी से अपेक्षित संवेदनशीलता और मर्यादित आचरण पर भी गंभीर प्रश्न खड़े करता है।
इसी मुद्दे को लेकर न्यायालय परिसर में अधिवक्ताओं की बैठक आयोजित की गई, जिसमें सर्वसम्मति से एसडीएम के कथित अभद्र एवं असंवेदनशील व्यवहार की निंदा करते हुए प्रस्ताव पारित किया गया। बैठक में उपस्थित अधिवक्ताओं ने कहा कि प्रशासनिक अधिकारियों से जनता, अधिवक्ताओं और न्यायालय से जुड़े सभी पक्षकारों के प्रति शालीन, संयमित और संवेदनशील व्यवहार की अपेक्षा की जाती है।
अधिवक्ताओं का कहना है कि किसी अधिकारी की भाषा या व्यवहार से यदि आमजन तथा न्यायिक व्यवस्था से जुड़े लोगों में असंतोष उत्पन्न होता है, तो उस पर समय रहते गंभीरता से विचार किया जाना आवश्यक है। उन्होंने प्रशासन और अधिवक्ता समुदाय के बीच सम्मानजनक संवाद एवं बेहतर समन्वय बनाए रखने की आवश्यकता पर भी जोर दिया।
उल्लेखनीय है कि एसडीएम अनुपम शर्मा ने लगभग दो सप्ताह पूर्व ही करैरा में पदभार ग्रहण किया है। अधिवक्ताओं का मानना है कि कार्यकाल के शुरुआती दिनों में ही इस प्रकार का विवाद सामने आना प्रशासनिक दृष्टि से चिंताजनक है। उन्होंने अपेक्षा जताई कि भविष्य में प्रशासन और अधिवक्ताओं के बीच संवाद, शिष्टाचार, संवेदनशीलता एवं पारदर्शिता को प्राथमिकता दी जाएगी।
