शिवपुरी। मक्सी-दाहोद बस दुर्घटना के बाद जिला प्रशासन और परिवहन विभाग अचानक सक्रिय नजर आ रहा है। कलेक्टर के निर्देश पर जिला परिवहन अधिकारन रंजना कुशवाह ने 3 दिनों में 75 स्लीपर और यात्री बसों की जांच कर 25 वाहनों पर कार्रवाई करते हुए 1 लाख 4 हजार 500 रुपये का जुर्माना वसूला गया है। लेकिन इस कार्रवाई के बीच सबसे बड़ा सवाल यह खड़ा हो रहा है कि यदि इतने कम समय में 25 वाहन नियमों का उल्लंघन करते मिले, तो दुर्घटना से पहले परिवहन विभाग की निगरानी व्यवस्था कितनी प्रभावी थी?
जानकारों का कहना है कि फिटनेस, परमिट, जीपीएस, सीसीटीवी, अग्नि सुरक्षा उपकरण और स्टाफ सत्यापन जैसे नियम नए नहीं हैं। ये वर्षों से लागू हैं। ऐसे में यदि बड़ी संख्या में बसें नियमों की अनदेखी कर संचालित हो रही थीं, तो नियमित जांच व्यवस्था पर प्रश्न उठना स्वाभाविक है।
हादसे के बाद कार्रवाई, पहले क्यों नहीं?
अक्सर देखा गया है कि किसी बड़ी दुर्घटना के बाद परिवहन विभाग अभियान चलाता है, जांच होती है और जुर्माने लगाए जाते हैं। लेकिन कुछ समय बाद यह कार्रवाई धीमी पड़ जाती है। सवाल यह है कि क्या जांच अभियान केवल दुर्घटनाओं के बाद की औपचारिकता बनकर रह गए हैं?
जुर्माना पर्याप्त या सिर्फ खानापूर्ति?
25 वाहनों पर कार्रवाई और करीब एक लाख रुपये जुर्माना वसूला गया, लेकिन क्या यह राशि यात्रियों की सुरक्षा से समझौता करने वालों के लिए पर्याप्त दंड है? यदि गंभीर खामियां मिलीं, तो क्या परमिट निलंबन, वाहन जब्ती या स्थायी कार्रवाई की गई? इस पर स्थिति स्पष्ट नहीं है।
फिटनेस प्रमाणपत्र और सड़क पर दौड़ती बसें
परिवहन व्यवस्था से जुड़े लोगों का मानना है कि कई बार पुराने वाहन फिटनेस प्रमाणपत्र के बावजूद सड़क पर चलते रहते हैं। सवाल यह भी है कि फिटनेस जांच कितनी पारदर्शी और कठोर होती है। यदि वाहन बाद में नियमविरुद्ध पाए जा रहे हैं, तो पूर्व में जारी फिटनेस प्रमाणपत्रों की समीक्षा भी जरूरी हो जाती है।
यात्रियों की सुरक्षा बनाम राजस्व वसूली
विशेषज्ञों के अनुसार परिवहन विभाग की प्राथमिकता केवल चालान काटना नहीं, बल्कि दुर्घटनाओं की रोकथाम होना चाहिए। नियमित निगरानी, तकनीकी जांच और जवाबदेही तय किए बिना केवल अभियान आधारित कार्रवाई लंबे समय तक प्रभावी नहीं मानी जा सकती।
प्रशासन की मौजूदा सख्ती स्वागतयोग्य है, लेकिन बड़ा प्रश्न अब भी कायम है—
क्या यह अभियान स्थायी सुधार की शुरुआत है या फिर किसी अगली दुर्घटना तक सीमित कार्रवाई?
