नई दिल्ली: मोदी सरकार में बड़ा प्रशासनिक फेरबदल हुआ है. धर्मेंद्र प्रधान के अचानक इस्तीफे के बाद वरिष्ठ भाजपा नेता और केंद्रीय मंत्री प्रहलाद जोशी को देश का नया शिक्षा मंत्री नियुक्त किया गया है. 25 जुलाई 2026 को उन्हें इस पद का अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया. राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के जमीनी कार्यकर्ता से केंद्रीय कैबिनेट तक का सफर तय करने वाले प्रहलाद जोशी को सरकार के सबसे भरोसेमंद संकटमोचकों में गिना जाता है. NEET विवाद और परीक्षा सुधारों की चुनौतियों के बीच उनकी यह नियुक्ति बेहद अहम मानी जा रही है.
कर्नाटक से है गहरा नाता, लगातार 5वीं बार हैं सांसद
27 नवंबर 1962 को कर्नाटक के विजयपुरा में जन्मे प्रहलाद जोशी मूल रूप से दक्षिण भारत के कद्दावर नेताओं में शुमार हैं. उनके पिता वेंकटेश जोशी भारतीय रेलवे में कार्यरत थे. प्रहलाद जोशी ने अपनी उच्च शिक्षा कर्नाटक विश्वविद्यालय (धारवाड़) से पूरी की, जहां से उन्होंने कला स्नातक (BA) की डिग्री हासिल की. वह वर्तमान में कर्नाटक की धारवाड़ लोकसभा सीट से लगातार पांचवीं बार सांसद हैं. साल 2004 में पहली बार संसद पहुंचने वाले जोशी 2012 से 2016 तक कर्नाटक भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष भी रह चुके हैं.
27 नवंबर 1962 को कर्नाटक के विजयपुरा में जन्मे प्रहलाद जोशी मूल रूप से दक्षिण भारत के कद्दावर नेताओं में शुमार हैं. उनके पिता वेंकटेश जोशी भारतीय रेलवे में कार्यरत थे. प्रहलाद जोशी ने अपनी उच्च शिक्षा कर्नाटक विश्वविद्यालय (धारवाड़) से पूरी की, जहां से उन्होंने कला स्नातक (BA) की डिग्री हासिल की. वह वर्तमान में कर्नाटक की धारवाड़ लोकसभा सीट से लगातार पांचवीं बार सांसद हैं. साल 2004 में पहली बार संसद पहुंचने वाले जोशी 2012 से 2016 तक कर्नाटक भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष भी रह चुके हैं.
ईदगाह मैदान आंदोलन से मिली थी बड़ी पहचान
प्रहलाद जोशी के राजनीतिक जीवन की शुरुआत RSS के एक समर्पित कार्यकर्ता के रूप में हुई थी. 1990 के दशक में हुबली के प्रसिद्ध ईदगाह मैदान आंदोलन में सक्रिय भूमिका निभाने के बाद वह राष्ट्रीय स्तर पर सुर्खियों में आए थे. अपनी साफ-सुथरी छवि और संगठनात्मक कौशल के कारण वह धीरे-धीरे भाजपा के शीर्ष नेतृत्व के करीब पहुंचे. मोदी सरकार के दूसरे कार्यकाल (2019-2024) में उन्होंने संसदीय कार्य मंत्री, कोयला मंत्री और खान मंत्री जैसे भारी-भरकम विभागों को बेहद कुशलता से संभाला था.
प्रहलाद जोशी के राजनीतिक जीवन की शुरुआत RSS के एक समर्पित कार्यकर्ता के रूप में हुई थी. 1990 के दशक में हुबली के प्रसिद्ध ईदगाह मैदान आंदोलन में सक्रिय भूमिका निभाने के बाद वह राष्ट्रीय स्तर पर सुर्खियों में आए थे. अपनी साफ-सुथरी छवि और संगठनात्मक कौशल के कारण वह धीरे-धीरे भाजपा के शीर्ष नेतृत्व के करीब पहुंचे. मोदी सरकार के दूसरे कार्यकाल (2019-2024) में उन्होंने संसदीय कार्य मंत्री, कोयला मंत्री और खान मंत्री जैसे भारी-भरकम विभागों को बेहद कुशलता से संभाला था.
जोशी के कंधों पर मंत्रालयों का ‘ट्रिपल’ लोड
नए शिक्षा मंत्री के रूप में प्रहलाद जोशी के सामने कई बड़ी चुनौतियां होंगी. देश में राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) को पूरी तरह लागू करने और हालिया परीक्षा विवादों के बाद छात्रों का भरोसा फिर से जीतना उनकी पहली प्राथमिकता होगी. गौरतलब है कि शिक्षा मंत्रालय के अलावा, जोशी के पास पहले से ही उपभोक्ता मामले, खाद्य और सार्वजनिक वितरण मंत्रालय तथा नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय का भी कार्यभार है. साथ ही वह इंटरनेशनल सोलर अलायंस (ISA) के अध्यक्ष पद की जिम्मेदारी भी संभाल रहे हैं.
नए शिक्षा मंत्री के रूप में प्रहलाद जोशी के सामने कई बड़ी चुनौतियां होंगी. देश में राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) को पूरी तरह लागू करने और हालिया परीक्षा विवादों के बाद छात्रों का भरोसा फिर से जीतना उनकी पहली प्राथमिकता होगी. गौरतलब है कि शिक्षा मंत्रालय के अलावा, जोशी के पास पहले से ही उपभोक्ता मामले, खाद्य और सार्वजनिक वितरण मंत्रालय तथा नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय का भी कार्यभार है. साथ ही वह इंटरनेशनल सोलर अलायंस (ISA) के अध्यक्ष पद की जिम्मेदारी भी संभाल रहे हैं.
