राठी ने वीडियो में बताया कि उन्हें करीब 22 से 23 घंटे तक हिरासत में रखा गया। उनका आरोप है कि इस दौरान उन्हें अपने कानूनी सलाहकार से मिलने की अनुमति नहीं दी गई। उन्होंने यह भी दावा किया कि उन्हें जबरन ले जाने के दौरान उनके शरीर और हाथों पर अंदरूनी चोटें आईं। रिहाई के बाद सामने आए वीडियो में उन्होंने अपनी आपबीती साझा करते हुए संबंधित कार्रवाई के तरीके पर सवाल उठाए। हालांकि, इन आरोपों के समर्थन में स्वतंत्र पुष्टि या पुलिस का पक्ष उपलब्ध जानकारी में शामिल नहीं है।
वीडियो में ध्रुव राठी ने अपनी नागरिकता को लेकर उठाए जाने वाले सवालों का भी जवाब दिया। उन्होंने भारतीय पासपोर्ट कैमरे के सामने दिखाते हुए कहा कि वह भारतीय नागरिक थे, हैं और आगे भी रहेंगे। उन्होंने अपनी राष्ट्रीय पहचान पर सवाल उठाने वालों को संबोधित करते हुए कहा कि उनका जुड़ाव भारत से है और उन्हें सच बोलने से रोका नहीं जा सकता। विदेश में निवास को लेकर उनकी नागरिकता पर होने वाली चर्चाओं के संदर्भ में उन्होंने अपने पासपोर्ट को अपनी पहचान का प्रमाण बताया।
राठी ने देश के मौजूदा राजनीतिक और प्रशासनिक हालात पर भी नाराजगी जाहिर की। उन्होंने आरोप लगाया कि भारत में अघोषित आपातकाल जैसी स्थिति बन रही है और सरकार के खिलाफ बोलने वाले लोगों तथा स्वतंत्र आवाजों को डराने का प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने मौजूदा परिस्थितियों की तुलना उत्तर कोरिया जैसे देशों से करते हुए दावा किया कि असहमति की आवाजों को दबाने की कोशिश हो रही है। ये टिप्पणियां उनके वीडियो में व्यक्त विचार और आरोप हैं।
उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, ध्रुव राठी को गुरुग्राम के केंद्रीय विहार स्थित आवास से ले जाकर सेक्टर-39 के क्राइम ब्रांच थाने में रखा गया था। इससे एक दिन पहले, शुक्रवार को उन्होंने सोशल मीडिया पर एक वीडियो जारी किया था, जिसमें नागरिकों से ‘सीजेपी प्रोटेस्ट’ में शामिल होने का आह्वान किया गया था। हालांकि, इस आह्वान और हिरासत की कार्रवाई के बीच संबंध को लेकर पुलिस का आधिकारिक बयान उपलब्ध विवरण में नहीं दिया गया है।
अपने वीडियो के अंतिम हिस्से में राठी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का नाम लेते हुए देश की लोकतांत्रिक संस्थाओं की स्वतंत्रता पर सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि निर्वाचन आयोग, न्यायपालिका और निष्पक्ष मीडिया जैसे प्रमुख संस्थानों पर सत्ता का प्रभाव बढ़ रहा है। उनके मुताबिक, ऐसी स्थिति लोकतंत्र के लिए चिंता का विषय है। उन्होंने अपनी हिरासत की कार्रवाई को लेकर भी असहमति जताई और इसे अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता से जुड़े सवालों के संदर्भ में रखा। मामले में पुलिस का पक्ष और हिरासत से संबंधित आधिकारिक विवरण सामने आने के बाद ही घटनाक्रम की पूरी स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
