नई दिल्ली । भारत और रूस की अटूट सामरिक दोस्ती अब समंदर की लहरों पर अपनी ताकत का प्रदर्शन करने जा रही है। रूस की सरकारी समाचार एजेंसी TASS की रिपोर्ट के अनुसार, आगामी फरवरी में दोनों देश बंगाल की खाड़ी में एक बड़ा संयुक्त नौसैनिक अभ्यास करने जा रहे हैं। इस सैन्य अभ्यास का उद्देश्य हिंद महासागर क्षेत्र में दोनों देशों के बीच समन्वय को और अधिक सशक्त बनाना है।
विशाखापत्तनम में जुटेगी रूसी नौसेना
इस ज्वॉइंट नेवल एक्सरसाइज के लिए रूसी नौसेना के प्रशांत बेड़े का एक शक्तिशाली फ्रिगेट ओमान के मस्कट बंदरगाह से रवाना होगा। शेड्यूल रूसी जहाज 18 से 25 फरवरी 2026 तक विशाखापत्तनम बंदरगाह का अनौपचारिक दौरा करेगा। मिलान-2026: यह जहाज भारत द्वारा आयोजित होने वाले बहुपक्षीय अभ्यास मिलान-2026में सक्रिय रूप से भाग लेगा। अभ्यास इंद्र गौरतलब है कि भारत और रूस पहले से ही इंद्र श्रृंखला के तहत द्विपक्षीय सैन्य अभ्यास करते आए हैं, लेकिन इस बार का युद्धाभ्यास कूटनीतिक रूप से काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
आर्थिक मोर्चे पर भी भारत-रूस की लंबी छलांग
केवल रक्षा क्षेत्र ही नहीं, बल्कि आर्थिक मोर्चे पर भी दोनों देशों के संबंध नए आयाम छू रहे हैं। मॉस्को में भारत के राजदूत विनय कुमार ने गणतंत्र दिवस के अवसर पर द्विपक्षीय व्यापार को लेकर बड़ी बातें साझा कीं 100 बिलियन का लक्ष्य: भारत और रूस साल 2030 तक 100 अरब अमेरिकी डॉलर के द्विपक्षीय व्यापार का लक्ष्य हासिल करने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहे हैं। व्यापार का विस्तार उर्वरक कृषि और इंजीनियरिंग जैसे क्षेत्रों में नए अवसरों की पहचान की गई है। मुक्त व्यापार समझौता राजदूत ने संकेत दिए कि एक फ्री ट्रेड एग्रीमेंटइस लक्ष्य को समय से पहले पूरा करने में गेम-चेंजर साबित होगा। रणनीतिक महत्व
बंगाल की खाड़ी में होने वाला यह युद्धाभ्यास न केवल आपसी सैन्य तालमेल को बढ़ाएगा बल्कि दक्षिण एशिया और हिंद-प्रशांत क्षेत्र में शांति और सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए एक बड़ा संदेश भी देगा। राष्ट्रपति पुतिन और पीएम मोदी के बीच हालिया सफल वार्ताओं ने इस साझेदारी को और अधिक प्रगाढ़ किया है।