गुस्करा नगरपालिका के वार्ड नंबर 3 स्थित मझपुकुर पार की रहने वाली कल्पिता माझी पहले घरेलू कामगार के रूप में काम करती थीं। वह चार घरों में झाड़ू-पोछा और सफाई कर लगभग ₹2,500 प्रतिमाह कमाकर अपने परिवार का पालन-पोषण करती थीं। अब वही कल्पिता जनता के वोट से विधायक बन गई हैं।
चुनाव परिणामों के मुताबिक, उन्होंने औशग्राम सीट से 1,07,692 वोट हासिल किए और अपने प्रतिद्वंद्वी श्यामा प्रसन्ना लोहार को 12,535 वोटों के अंतर से हराया। यह जीत सिर्फ राजनीतिक उपलब्धि नहीं, बल्कि उनके लंबे संघर्ष की पहचान भी है। अनुसूचित जाति वर्ग से आने वाली कल्पिता माझी ने अपनी उम्मीदवारी की घोषणा के साथ ही सक्रिय चुनाव प्रचार शुरू कर दिया था।
कल्पिता इससे पहले साल 2021 के विधानसभा चुनाव में भी भाजपा के टिकट पर मैदान में उतरी थीं, लेकिन तब उन्हें तृणमूल कांग्रेस के उम्मीदवार से हार का सामना करना पड़ा था। इसके बावजूद भारतीय जनता पार्टी ने उन पर भरोसा कायम रखा, जो इस बार जीत में बदल गया।
घरेलू काम से लेकर चुनावी मैदान तक का उनका सफर साधारण जीवन से उठकर जनप्रतिनिधि बनने की मिसाल है। चुनाव प्रचार के दौरान उन्होंने घर-घर जाकर लोगों से संपर्क किया और अपने संघर्ष को ही अपनी सबसे बड़ी ताकत बनाया।
राज्य के चुनाव परिणामों में भारतीय जनता पार्टी ने पहली बार बड़ी जीत दर्ज करते हुए 206 सीटों पर कब्जा जमाया और सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी। वहीं ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस को 80 सीटें मिलीं और एक सीट पर बढ़त के साथ कुल 81 सीटों तक सीमित रहना पड़ा। कांग्रेस को 2 सीटें मिलीं, जबकि AJUP भी 2 सीटों पर सिमट गई। वाम दल CPI(M) और AIF को एक-एक सीट से संतोष करना पड़ा।
