पाकिस्तान उच्चायोग की ओर से जारी आधिकारिक बयान के अनुसार, वीजा प्राप्त श्रद्धालु पाकिस्तान स्थित प्रमुख सिख धार्मिक स्थलों के दर्शन कर सकेंगे। इनमें गुरुद्वारा पंजा साहिब, गुरुद्वारा ननकाना साहिब, गुरुद्वारा करतारपुर साहिब सहित कई ऐतिहासिक और आस्था से जुड़े स्थान शामिल हैं। हर वर्ष बड़ी संख्या में भारतीय सिख श्रद्धालु इन पवित्र स्थलों की यात्रा करते हैं और गुरु अर्जुन देव जी की शहादत को श्रद्धापूर्वक स्मरण करते हैं।
भारत में पाकिस्तान के कार्यवाहक उच्चायुक्त साद अहमद वाराइच ने सभी श्रद्धालुओं को सफल, सुरक्षित और शांतिपूर्ण यात्रा की शुभकामनाएं दी हैं। उन्होंने कहा कि धार्मिक यात्राओं को सुगम बनाना दोनों देशों के बीच स्थापित द्विपक्षीय समझौतों और धार्मिक स्वतंत्रता के सम्मान का हिस्सा है। पाकिस्तान उच्चायोग ने यह भी स्पष्ट किया कि वीजा जारी करने की प्रक्रिया 1974 में भारत और पाकिस्तान के बीच हुए धार्मिक स्थलों की यात्रा संबंधी प्रोटोकॉल के तहत की गई है।
इधर, शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (एसजीपीसी) को भी इस संबंध में बड़ी राहत मिली है। एसजीपीसी की धर्म प्रचार समिति के सचिव गुरिंदर सिंह मथरेवाल ने जानकारी दी कि कमेटी ने कुल 561 तीर्थयात्रियों के पासपोर्ट पाकिस्तान दूतावास में जमा कराए थे। इनमें से 541 श्रद्धालुओं को वीजा स्वीकृत कर दिया गया, जबकि 20 आवेदनों को मंजूरी नहीं मिल सकी।
मथरेवाल के अनुसार, वीजा प्राप्त श्रद्धालुओं का जत्था बुधवार को अमृतसर स्थित एसजीपीसी मुख्यालय से पाकिस्तान के लिए रवाना होगा। यात्रा के दौरान श्रद्धालु विभिन्न ऐतिहासिक गुरुद्वारों में मत्था टेकेंगे और गुरु अर्जुन देव जी के शहीदी दिवस से जुड़े विशेष धार्मिक कार्यक्रमों में हिस्सा लेंगे। यह धार्मिक यात्रा 19 जून तक चलेगी, जिसके बाद श्रद्धालु भारत लौट आएंगे।
सिख समुदाय के लिए यह यात्रा केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं बल्कि अपनी ऐतिहासिक और आध्यात्मिक विरासत से जुड़ने का एक महत्वपूर्ण अवसर भी मानी जाती है। दोनों देशों के बीच राजनीतिक संबंधों में उतार-चढ़ाव के बावजूद धार्मिक यात्राओं के लिए वीजा जारी होना श्रद्धालुओं के लिए राहत और खुशी का विषय माना जा रहा है।
गुरु अर्जुन देव जी की शहादत को सिख इतिहास में त्याग, साहस और धर्म के प्रति समर्पण के प्रतीक के रूप में देखा जाता है। ऐसे में उनके शहीदी दिवस पर बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं को पाकिस्तान स्थित पवित्र स्थलों के दर्शन का अवसर मिलना सिख संगत के लिए विशेष महत्व रखता है।
