शिवसेना (यूबीटी) ने पुल पर ‘पद्मश्री नाना पाटेकर सेतु’ नाम का बैनर भी लगाया है। पार्टी के प्रतिनिधिमंडल ने मुंबई की मेयर ऋतु तावड़े से मुलाकात कर उन्हें एक पत्र सौंपा। इस पत्र में मांग की गई कि नए पुल का नाम नाना पाटेकर के नाम पर रखा जाए। पार्टी का मानना है कि नाना पाटेकर ने फिल्मों के अलावा सामाजिक कार्यों के जरिए भी महाराष्ट्र के लोगों के बीच विशेष पहचान बनाई थी।
दूसरी ओर, भाजपा विधायक पराग शाह ने पुल का नाम कैप्टन स्मित मच्छार के नाम पर रखने का प्रस्ताव दिया है। मच्छार ने 30 सितंबर को दुबई से तेल अवीव जा रही फ्लाईदुबई की उड़ान में अपहरण की कोशिश को नाकाम करने में अहम भूमिका निभाई थी। इस घटना के दौरान गंभीर चोटों के बावजूद उन्होंने विमान की सुरक्षा से जुड़ी परिस्थितियों का सामना किया। उनके साहस और यात्रियों की सुरक्षा के लिए किए गए प्रयासों के कारण उनका नाम भी पुल के नामकरण की चर्चा में शामिल हो गया है।
बृहन्मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) में सदन के नेता गणेश खनकर ने शिवसेना (यूबीटी) पर इस मामले में राजनीतिक श्रेय लेने के लिए विवाद खड़ा करने का आरोप लगाया। उनका कहना है कि नाना पाटेकर को सम्मान देने के लिए पुल के बजाय किसी थिएटर या थिएटर परिसर का नाम उनके नाम पर रखना अधिक उपयुक्त होगा। इस तरह पुल के नाम को लेकर दोनों पक्षों की राय अलग-अलग है। फिलहाल नामकरण को लेकर कोई अंतिम निर्णय सामने नहीं आया है।
बीएमसी के अनुसार, विद्याविहार का यह पुल लगभग 650 मीटर लंबा और दो लेन वाला है। यह विद्याविहार स्टेशन के पूर्वी हिस्से में रामचंद्र चेंबूरकर मार्ग को घाटकोपर के पश्चिमी हिस्से में लाल बहादुर शास्त्री मार्ग से जोड़ता है। पुल का लगभग 100 मीटर हिस्सा रेलवे पटरियों के ऊपर बनाया गया है। इस संपर्क मार्ग से पूर्वी और पश्चिमी हिस्सों के बीच आवागमन में सुविधा मिलने की उम्मीद है।
नाना पाटेकर का जन्म महाराष्ट्र के रायगढ़ जिले के मुरुड-जंजीरा में हुआ था। उन्होंने अपने अभिनय के लिए तीन राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार हासिल किए और वर्ष 2013 में पद्मश्री से सम्मानित हुए। फिल्मों के अलावा किसानों की मदद के लिए किए गए कार्यों के कारण भी उन्हें पहचान मिली। उन्होंने राज कपूर पुरस्कार के तहत मिली 10 लाख रुपये की राशि सूखा राहत के लिए दान कर दी थी। वर्ष 2015 में उन्होंने अभिनेता मकरंद अनासपुरे के साथ नाम फाउंडेशन की स्थापना की।
यह संस्था सूखे से प्रभावित किसानों और उनके परिवारों की मदद करती है। उसी वर्ष उन्होंने विदर्भ के 62 परिवारों और लातूर तथा उस्मानाबाद के 113 परिवारों को चेक वितरित किए थे। उन्होंने प्रादेशिक सेना में भी सेवा दी थी और 1999 के कारगिल युद्ध के दौरान उनकी भूमिका का भी उल्लेख किया जाता है। 8 अक्टूबर 2026 को गोवा में 75 वर्ष की उम्र में उनका निधन हो गया।
कैप्टन स्मित मच्छार का परिवार मुंबई के घाटकोपर पूर्व में रहता है। वह कपड़ा कारोबारी परिवार से आते हैं और उन्होंने टेक्सटाइल इंजीनियरिंग की पढ़ाई की थी। एक पॉडकास्ट में उन्होंने बताया था कि बचपन से पायलट बनना उनका सपना नहीं था। उन्होंने स्पाइसजेट में 11 साल काम करने के बाद वर्ष 2022 में फ्लाईदुबई में नौकरी शुरू की।
30 सितंबर को वह उड़ान एफजेड-1073 के कप्तान थे। दुबई से तेल अवीव जा रहे इस विमान में 174 लोग सवार थे। उड़ान के दौरान उनके सह-पायलट ने उन पर कुल्हाड़ी से हमला कर दिया। गंभीर चोटों के बावजूद मच्छार ने कॉकपिट का दरवाजा खोला, जिसके बाद यात्रियों और चालक दल के सदस्यों ने हमलावर को काबू करने में मदद की।
अब विद्याविहार पुल के नामकरण पर अंतिम फैसला संबंधित प्राधिकरणों को लेना है। नाना पाटेकर के सामाजिक योगदान और स्मित मच्छार के साहसिक कार्य, दोनों को उनके समर्थक सम्मान देने योग्य बता रहे हैं। ऐसे में देखना होगा कि मुंबई के इस नए पुल को आखिर किस नाम से पहचान मिलती है।
