सबसे बड़ा उलटफेर पश्चिम बंगाल में देखने को मिला, जहां भारतीय जनता पार्टी ने पहली बार सत्ता पर कब्जा कर लिया। पार्टी ने महज 10 साल में 3 सीटों से छलांग लगाकर 207 सीटों तक पहुंचकर इतिहास रच दिया। दूसरी ओर तृणमूल कांग्रेस 81 सीटों पर सिमट गई। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी समेत 22 मंत्री चुनाव हार गए, जिससे 15 साल पुराना उनका शासन खत्म हो गया।
बंगाल में भाजपा का स्ट्राइक रेट करीब 70% रहा, जो इस जीत की ताकत को दर्शाता है। पार्टी ने बिना मुख्यमंत्री चेहरे के चुनाव लड़ा, ऐसे में अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि राज्य की कमान किसे मिलेगी। संभावित चेहरों में सुवेंदु अधिकारी, सुकांत मजूमदार, दिलीप घोष और समिक भट्टाचार्य शामिल हैं। साथ ही महिला मुख्यमंत्री के विकल्प पर भी चर्चा तेज है।
इस जीत में नरेंद्र मोदी और अमित शाह की रणनीति अहम मानी जा रही है। मोदी ने 242 सीटों पर प्रचार किया, जिनमें से 184 सीटों पर भाजपा को जीत मिली। वहीं ‘पन्ना प्रमुख’ जैसी रणनीति और बूथ स्तर की माइक्रो मैनेजमेंट ने भी बड़ा असर डाला।
तमिलनाडु में भी बड़ा राजनीतिक भूचाल आया। यहां एक्टर विजय की 2 साल पुरानी पार्टी तमिलगा वेत्री कझगम ने 108 सीटें जीतकर सबको चौंका दिया। 59 साल में पहली बार ऐसा होगा जब राज्य में DMK या AIADMK के अलावा किसी तीसरी पार्टी की सरकार बनेगी। मुख्यमंत्री एमके स्टालिन भी चुनाव हार गए, जो इस बदलाव की बड़ी मिसाल है।
केरल में 10 साल बाद कांग्रेस की वापसी हुई है, जिससे राज्य में वामपंथी सरकार का अंत हो गया। वहीं असम में भाजपा ने लगातार तीसरी बार सरकार बनाकर अपनी पकड़ मजबूत की है।
कुल मिलाकर, इन चुनाव नतीजों ने साफ कर दिया है कि देश की राजनीति में बड़ा बदलाव चल रहा है। कहीं दशकों पुरानी सरकारें खत्म हो रही हैं, तो कहीं नई पार्टियां तेजी से उभर रही हैं। आने वाले समय में इन नतीजों का असर राष्ट्रीय राजनीति पर भी साफ देखने को मिलेगा।
