धीरेंद्र शास्त्री ने लुधियाना के लोगों से कहा कि वह वहां से जा रहे हैं और जाते समय उन्हें एक बात जरूर कहना चाहते हैं। उन्होंने आर्थिक स्थिति को लेकर भी अपनी बात रखी और कहा कि जिसके पास पैसा नहीं होता उसे समाज में अक्सर वह सम्मान नहीं मिलता जो संपन्न व्यक्ति को मिलता है। उन्होंने मंच से मौजूद लोगों का उदाहरण देते हुए कहा कि बड़े और अमीर लोग आसानी से मंच तक पहुंच जाते हैं जबकि गरीब व्यक्ति भीड़ में खड़ा रहकर सिर्फ ताली बजाता रह जाता है। इसी दौरान उन्होंने अपने जीवन के उन दिनों को याद किया जब उनके परिवार ने बेहद कठिन परिस्थितियों में समय बिताया था।
अपने संघर्ष को याद करते हुए धीरेंद्र शास्त्री ने बताया कि उन्होंने गरीबी के दिन देखे हैं और भगवान से प्रार्थना की कि किसी को ऐसे दिन न देखने पड़ें। उन्होंने अपने बचपन के बारे में बताते हुए कहा कि वह करीब 15 साल तक भीख मांगने की स्थिति में रहे। उनका परिवार एक छोटी सी झोपड़ी में रहता था जहां माता पिता भाई बहन सभी साथ रहते थे। घर में उजाले के लिए बल्ब तक नहीं था। कभी कोई मिट्टी का तेल दे देता तो उसी से दीपक जलाकर रात गुजरती थी।
उन्होंने बताया कि आज भले ही उनके पहनावे में बदलाव दिखाई देता हो लेकिन एक समय ऐसा भी था जब उनके पास पहनने के लिए सीमित कपड़े होते थे। एक कुर्ता लंबे समय तक पहनना पड़ता था। रक्षाबंधन की याद साझा करते हुए उन्होंने कहा कि उनकी बहन के पास मिठाई खरीदने के पैसे नहीं होते थे इसलिए वह चीनी से उनका मुंह मीठा कराती थी। इन पुरानी यादों को बताते हुए वह मंच पर भावुक हो गए।
धीरेंद्र शास्त्री ने कहा कि गरीबी से बड़ी परेशानी शायद ही कोई हो। उन्होंने लोगों को अपनी मां की सीख भी बताई कि इस दुनिया से कुछ मांगने के बजाय उस ईश्वर से मांगना चाहिए जिसने पूरी दुनिया बनाई है। उनकी यह बात सुनकर कार्यक्रम में मौजूद श्रद्धालु भी भावुक नजर आए। सोशल मीडिया पर सामने आए इस वीडियो में उनके संघर्ष की कहानी और मंच पर छलके आंसुओं ने लोगों का ध्यान खींचा है।
