11 अक्टूबर को नवरात्रि के पहले दिन प्रतिपदा तिथि पर घटस्थापना और मां शैलपुत्री की पूजा होगी। घटस्थापना को कलश स्थापना भी कहा जाता है। इस दौरान कलश स्थापित करने के साथ जौ बोने की परंपरा भी है। दिए गए पंचांग के अनुसार, 11 अक्टूबर को घटस्थापना का शुभ समय सुबह 6:19 बजे से 10:12 बजे तक बताया गया है। अभिजीत मुहूर्त सुबह 11:44 बजे से दोपहर 12:30 बजे तक रहेगा। घटस्थापना का समय अलग-अलग शहरों में स्थानीय सूर्योदय और पंचांग की गणना के कारण कुछ मिनट आगे-पीछे हो सकता है, इसलिए स्थानीय पंचांग के अनुसार मुहूर्त देखना उचित माना गया है।
नवरात्रि की प्रमुख तिथियों के अनुसार 12 अक्टूबर को द्वितीया पर मां ब्रह्मचारिणी, 13 अक्टूबर को तृतीया पर मां चंद्रघंटा, 14 अक्टूबर को चतुर्थी पर मां कूष्मांडा और 15 अक्टूबर को पंचमी पर मां स्कंदमाता की पूजा होगी। 16 अक्टूबर को षष्ठी पर मां कात्यायनी और 17 अक्टूबर को सप्तमी पर मां कालरात्रि की आराधना की जाएगी। 19 अक्टूबर को दुर्गा अष्टमी और महानवमी से जुड़े अनुष्ठान होंगे, जबकि 20 अक्टूबर को विजयादशमी और दशहरा मनाया जाएगा। नवरात्रि में मां के नौ स्वरूपों में पहले दिन शैलपुत्री, दूसरे दिन ब्रह्मचारिणी, तीसरे दिन चंद्रघंटा, चौथे दिन कूष्मांडा, पांचवें दिन स्कंदमाता, छठे दिन कात्यायनी, सातवें दिन कालरात्रि, आठवें दिन महागौरी और नौवें दिन सिद्धिदात्री की पूजा की जाती है।
धार्मिक मान्यता के अनुसार नवरात्रि के दौरान शक्ति की आराधना करने से साहस, आत्मविश्वास और सकारात्मक ऊर्जा प्राप्त होती है। भक्त अपनी श्रद्धा के अनुसार उपवास रखते हैं और मां दुर्गा की पूजा-अर्चना करते हैं। नवरात्रि के बाद दसवें दिन विजयादशमी मनाई जाती है, जिसे बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक माना जाता है। रामायण की मान्यता के अनुसार इसी दिन भगवान राम ने रावण का वध किया था। इसी वजह से देश के अलग-अलग हिस्सों में दशहरे के दिन रावण, कुंभकर्ण और मेघनाद के पुतले जलाने की परंपरा है।
घटस्थापना को नवरात्रि का महत्वपूर्ण अनुष्ठान माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इसे शुभ मुहूर्त में किया जाना चाहिए। कलश स्थापना के लिए साफ स्थान का चयन किया जाता है और पूजा स्थल को अच्छी तरह साफ किया जाता है। इसके बाद कलश में जल भरकर उसके ऊपर आम या अशोक के पत्ते और नारियल रखने की परंपरा है। घटस्थापना के मुहूर्त पर स्थानीय सूर्योदय और पंचांग की गणना का प्रभाव पड़ता है, इसलिए अलग-अलग शहरों में समय में अंतर हो सकता है। उदाहरण के तौर पर मुंबई और दिल्ली के लिए बताए गए घटस्थापना मुहूर्त अलग हो सकते हैं।
