नई दिल्ली: कोलकाता के साल्ट लेक स्टेडियम में शनिवार को खेले गए ऐतिहासिक फ्रेंडली मुकाबले में ब्राजील की सीनियर पुरुष राष्ट्रीय फुटबॉल टीम ने भारत को 4-0 से हरा दिया। भारतीय सरजमीं पर ब्राजील का यह पहला सीनियर अंतरराष्ट्रीय मुकाबला था। शुरुआत में भारतीय टीम ने ब्राजील को कुछ समय तक बराबरी की चुनौती दी, लेकिन मुकाबला आगे बढ़ने के साथ ब्राजील ने नियंत्रण हासिल कर लिया। हाफ-टाइम से पहले ही ब्राजील ने दो गोल कर अपनी स्थिति मजबूत कर ली थी। मैच में एस्तेवाओ, पेड्रो और सैमुअल लीनो ने ब्राजील के लिए गोल किए।
मुकाबले के 28वें मिनट में एस्तेवाओ ने भारतीय रक्षापंक्ति को छकाते हुए नियर-पोस्ट की ओर तेज शॉट लगाया। गेंद भारतीय कप्तान और गोलकीपर गुरप्रीत सिंह संधू के हाथ से छूकर नेट में चली गई और ब्राजील को बढ़त मिल गई। इसके बाद 42वें मिनट में एस्तेवाओ ने पेनल्टी एरिया में पेड्रो को पास दिया, जिसे पेड्रो ने गोल में बदलकर ब्राजील की बढ़त 2-0 कर दी। हाफ-टाइम के दौरान ब्राजील के मुख्य कोच कार्लो एंसेलोटी ने पांच बदलाव किए। ब्रूनो गुइमारेस, गैब्रिएल मैगालहेस, वांडरसन, सैमुअल लीनो और डगलस लुइज को मैदान पर उतारा गया।
दूसरे हाफ में सैमुअल लीनो ने ब्राजील की बढ़त को और मजबूत किया। 58वें मिनट में भारतीय टीम डिफेंस से गेंद आगे बढ़ाने के प्रयास में उसे गंवा बैठी। इसका फायदा उठाकर लीनो बाईं ओर जगह बनाने में सफल रहे और उन्होंने दूर के कोने में नीचा कर्लिंग शॉट लगाकर स्कोर 3-0 कर दिया। इसके कुछ समय बाद भारत के पास गोल करने का मौका आया। रयान विलियम्स ब्राजील के पेनल्टी बॉक्स में पहुंचे, लेकिन उनके प्रयास को रोक दिया गया। इंजरी टाइम के 94वें मिनट में लीनो ने बॉक्स के किनारे से कट-इन करते हुए अपना दूसरा गोल दागा और ब्राजील की 4-0 की जीत पक्की कर दी।
भारत और ब्राजील की सीनियर पुरुष टीमों के बीच यह इतिहास की पहली अंतरराष्ट्रीय भिड़ंत थी। भारतीय जमीन पर ब्राजील का यह पहला सीनियर मैच भी रहा। ब्राजीलियाई फुटबॉल कन्फेडरेशन के अनुसार, भारत ब्राजील का सामना करने वाली 92वीं अलग राष्ट्रीय टीम बना। रैंकिंग के लिहाज से भी मुकाबला खास रहा। ब्राजील ने पिछले 28 वर्षों में भारत जितनी कम रैंकिंग वाली टीम के खिलाफ मैच नहीं खेला था, जबकि भारत ने 1993 में फीफा रैंकिंग शुरू होने के बाद ब्राजील जितनी ऊंची रैंकिंग वाली टीम का सामना नहीं किया था। कोलकाता पहुंचने से पहले ब्राजील ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ 1-1 से ड्रॉ और 4-2 की जीत दर्ज कर चुका था। ब्राजील के कोच के तौर पर कार्लो एंसेलोटी का यह 20वां मैच था।
मुकाबले के लिए सुरक्षा के भी कड़े इंतजाम किए गए थे। साल्ट लेक स्टेडियम में करीब 2,000 पुलिसकर्मी और 400 से ज्यादा वॉलंटियर्स तैनात किए गए थे। अतिरिक्त केंद्रीय बल भी लगाए गए और स्टेडियम में मौजूद सीसीटीवी के अलावा 100 से अधिक अस्थायी कैमरे लगाए गए। इसके बावजूद करीब 85,000 दर्शकों की क्षमता वाले स्टेडियम का बड़ा हिस्सा खाली नजर आया।
कम भीड़ के पीछे दुर्गा पूजा से ठीक पहले मैच का आयोजन, टिकटों की ऊंची कीमत और ब्राजील के स्टार खिलाड़ी नेमार की गैरमौजूदगी को प्रमुख कारण माना गया। आयोजन से जुड़ी लागत कम करने के लिए टिकटों की कीमतें ऊंची रखी गई थीं। बाद में स्थानीय क्लबों के प्रशंसकों के लिए छूट दी गई और मैच के दिन एक टिकट पर एक मुफ्त टिकट का ऑफर भी शुरू किया गया, लेकिन इसके बावजूद स्टेडियम पूरी तरह नहीं भर सका।
