208 रनों के विशाल लक्ष्य का पीछा करने उतरी मुंबई की शुरुआत बेहद निराशाजनक रही। टीम ने महज 11 रनों के स्कोर पर अपने 3 महत्वपूर्ण विकेट गंवा दिए थे। सलामी जोड़ी और शुरुआती बल्लेबाज खाता खोलने में भी संघर्ष करते नजर आए। मध्यक्रम में सूर्यकुमार यादव (35) और तिलक वर्मा (37) ने 70 रनों की साझेदारी कर पारी को संभालने की कोशिश जरूर की, लेकिन स्पिन गेंदबाजों के घातक जाल के सामने मध्यक्रम ताश के पत्तों की तरह ढह गया। कप्तान और अनुभवी विदेशी खिलाड़ी भी बिना खाता खोले पवेलियन लौट गए। पूरी टीम 19 ओवर में महज 104 रनों पर सिमट गई।
गेंदबाजी में चेन्नई की ओर से अकील होसेन सबसे सफल रहे, जिन्होंने 4 विकेट चटकाकर मुंबई की बल्लेबाजी की कमर तोड़ दी। वहीं नूर अहमद ने भी दो महत्वपूर्ण सफलताएं हासिल कीं। यह मैच चेन्नई के लिए भावनात्मक रूप से भी खास था, क्योंकि पूरी टीम ने अपने एक साथी खिलाड़ी की दिवंगत माता को श्रद्धांजलि देने के लिए काली पट्टी बांधकर मैदान संभाला था। उस तेज गेंदबाज ने भी व्यक्तिगत दुख के बावजूद टीम के लिए शानदार खेल दिखाया और एक विकेट हासिल किया। इस जीत के साथ ही चेन्नई ने मुंबई के खिलाफ सर्वाधिक जीत दर्ज करने वाली टीम बनने का गौरव भी प्राप्त कर लिया है।
प्रशंसकों को इस मैच में कुछ दिग्गज खिलाड़ियों की वापसी की उम्मीद थी, लेकिन चोट और फिटनेस संबंधी कारणों से वे मैदान पर नहीं उतर सके। इस करारी हार ने मुंबई के लिए मौजूदा सीजन की राह को और अधिक चुनौतीपूर्ण बना दिया है, जबकि चेन्नई ने इस धमाकेदार प्रदर्शन से अंक तालिका में अपनी स्थिति काफी मजबूत कर ली है। वानखेड़े की पिच पर स्पिनरों का बोलबाला रहा, जहाँ मेहमान टीम के फिरकी गेंदबाजों ने बल्लेबाजों को क्रीज पर टिकने का कोई मौका नहीं दिया।
