आंकड़ों की नजर से देखें तो यह मुकाबला ऐतिहासिक रहा। इस सीजन में यहाँ खेले गए पिछले मैचों में दर्शकों की संख्या 35 से 45 हजार के बीच सिमट कर रह गई थी, लेकिन जैसे ही मैदान पर बेंगलुरु की टीम और उनके सबसे बड़े सितारे का आगमन हुआ, अटेंडेंस का ग्राफ सीधे 90 हजार के पार पहुँच गया। आधिकारिक जानकारी के अनुसार, कुल 90,865 दर्शकों ने स्टेडियम की दीर्घाओं को भरा, जो इस साल के खेल सत्र का अब तक का सबसे बड़ा रिकॉर्ड है। इससे पहले मुंबई और राजस्थान जैसी दिग्गज टीमों के खिलाफ हुए मैचों में भी दर्शकों की संख्या इस जादुई आंकड़े के आधे तक भी नहीं पहुँच सकी थी। यह भीड़ दर्शाती है कि प्रशंसकों के लिए खेल से बढ़कर खिलाड़ी का व्यक्तित्व और उसका जुड़ाव मायने रखता है।
स्टेडियम के भीतर का माहौल पूरी तरह से एकतरफा नजर आ रहा था। हालांकि यह गुजरात टाइटन्स का घरेलू मैदान था, लेकिन स्टैंड्स में मौजूद भीड़ का समर्थन और शोर सबसे ज्यादा मेहमान टीम के पूर्व कप्तान के लिए था। ऐसा लग रहा था मानो पूरा अहमदाबाद सिर्फ अपने चहेते खिलाड़ी को खेलते देखने के लिए सड़कों पर उतर आया हो। यही स्थिति कुछ समय पहले देश की राजधानी के मैदान पर भी देखी गई थी, जहाँ टिकटों के लिए मारामारी और स्टेडियम के बाहर समर्थकों की लंबी कतारें एक आम नजारा बन गई थीं। अहमदाबाद में भी एंट्री गेट्स पर प्रशंसकों का जोश और उनकी कतारें यह बता रही थीं कि क्रिकेट का असली रोमांच आज भी मैदान के अंदर मौजूद उन सितारों से है जो खेल को एक त्योहार बना देते हैं।
इस अभूतपूर्व भीड़ ने न केवल आयोजकों को गदगद कर दिया, बल्कि खेल के भविष्य और खिलाड़ियों की विरासत पर भी एक गहरी छाप छोड़ी है। जहाँ एक तरफ युवा खिलाड़ियों का उदय हो रहा है, वहीं दूसरी तरफ पुराने दिग्गजों का दबदबा आज भी कायम है। 90 फीसदी तक भरे हुए इस स्टेडियम ने एक संदेश साफ कर दिया है कि भले ही प्रारूप बदल रहे हों या खिलाड़ी रिटायरमेंट ले रहे हों, लेकिन मैदान पर उनकी मौजूदगी ही दर्शकों को खींच लाने के लिए काफी है। इस ऐतिहासिक उपस्थिति ने अहमदाबाद के इस मैदान को इस सीजन के सबसे सफल आयोजन केंद्रों में शामिल कर दिया है, जिसका श्रेय पूरी तरह से क्रिकेट प्रेमियों के जुनून को जाता है।
