दीक्षा समारोह में रोबोट ‘गाबी’ पारंपरिक बौद्ध चोला पहनकर मंच पर पहुंचा। वरिष्ठ भिक्षुओं ने उसके गले में 108 मोतियों की माला पहनाई और उसने इंसानों की तरह हाथ जोड़कर सिर झुकाया। जब उससे पूछा गया कि क्या वह खुद को बौद्ध धर्म के लिए समर्पित करेगा, तो रोबोट ने जवाब दिया, “हां, मैं खुद को समर्पित करूंगा।”
मंत्र पढ़ सकता है ‘गाबी’
रिपोर्ट्स के मुताबिक ‘गाबी’ चीन के Unitree Robotics के G1 ह्यूमनॉइड प्लेटफॉर्म पर आधारित है। यह चल सकता है, इशारों में संवाद कर सकता है और मंत्रों का उच्चारण भी कर सकता है। साथ ही धार्मिक अनुष्ठानों के दौरान झुककर प्रणाम करने में भी सक्षम है।
युवाओं को धर्म से जोड़ने की कोशिश
‘गाबी’ को दक्षिण कोरिया के सबसे बड़े बौद्ध संप्रदाय Jogye Order ने विकसित किया है। इसका उद्देश्य डिजिटल युग में बौद्ध धर्म को आधुनिक स्वरूप देना और युवाओं को धर्म से जोड़ना बताया गया है।
इंसानों जैसी रस्में, लेकिन अलग अंदाज
आमतौर पर भिक्षु बनने की रस्म में सिर पर अगरबत्ती से निशान बनाया जाता है, लेकिन रोबोट होने की वजह से ‘गाबी’ पर प्रतीकात्मक स्टिकर लगाया गया। बताया गया कि ‘गाबी’ नाम गौतम बुद्ध के बचपन के नाम ‘सिद्धार्थ’ और कोरियाई भाषा के ‘दया’ शब्द को मिलाकर बनाया गया है।
AI और इंसानों के तालमेल की तैयारी
जोग्ये ऑर्डर के अधिकारियों का कहना है कि यह प्रयोग भविष्य में इंसानों और रोबोट्स के बीच तालमेल को समझने की दिशा में एक कदम है। ‘गाबी’ इस महीने होने वाले लालटेन महोत्सव में भी हिस्सा लेगा।विशेषज्ञ मानते हैं कि दुनिया भर में ह्यूमनॉइड रोबोट्स का इस्तेमाल तेजी से बढ़ रहा है और आने वाले समय में शिक्षा, धर्म, स्वास्थ्य और सेवा क्षेत्रों में AI आधारित रोबोट्स की भूमिका और बड़ी हो सकती है।
