टिम कुक के मुताबिक, पिछले साल तक मेमोरी की कीमतों का असर सीमित था, लेकिन मार्च तिमाही में इसमें बढ़ोतरी शुरू हो गई थी, जिसे कंपनी ने अपने मौजूदा स्टॉक और इन्वेंट्री के जरिए कुछ हद तक संभाल लिया। अब यह “बफर” खत्म होने की कगार पर है, जिससे वास्तविक लागत दबाव सामने आ सकता है।
कुक ने साफ कहा कि जून तिमाही में मेमोरी की लागत में और तेज बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है। हालांकि Apple फिलहाल इस असर को पूरी तरह ग्राहकों पर नहीं डाल रहा है, लेकिन कंपनी के पास मौजूद पुरानी इन्वेंट्री का फायदा अब धीरे-धीरे खत्म हो रहा है।
इसी कारण बाजार में यह अटकलें तेज हो गई हैं कि जून के बाद या आने वाले महीनों में iPhone की कीमतें बढ़ सकती हैं। हालांकि Apple ने अभी तक किसी भी आधिकारिक कीमत वृद्धि की घोषणा नहीं की है, लेकिन टिम कुक ने यह जरूर संकेत दिया कि कंपनी लगातार कई विकल्पों पर विचार कर रही है।
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर मेमोरी और कंपोनेंट्स की वैश्विक कीमतें इसी तरह बढ़ती रहीं, तो Apple को भी अपने अन्य प्रतिस्पर्धियों की तरह प्रोडक्ट की कीमतों में बदलाव करना पड़ सकता है। फिलहाल iPhone मौजूदा कीमतों पर ही बिक रहे हैं, लेकिन आने वाला समय महंगा पड़ सकता है।
