वाशिंगटन/पटना। बिहार में बाढ़ की भयावह स्थिति अब अंतरिक्ष से ली गई तस्वीरों में भी नजर आ रही है। अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी NASA की अर्थ ऑब्जर्वेटरी ने गंडक नदी में आई अभूतपूर्व बाढ़ को लेकर ‘Rains Swamp the Gandak River’ शीर्षक से रिपोर्ट प्रकाशित की है। बिहार के उपमुख्यमंत्री विजय कुमार चौधरी ने भी गंडक नदी के जलस्तर में रिकॉर्ड बढ़ोतरी की पुष्टि करते हुए कहा कि नेपाल में असाधारण रूप से हुई भारी बारिश के कारण नेपाल और भारत के कुछ हिस्सों में नदी का जलस्तर ऐतिहासिक स्तर तक पहुंच गया।
छह जिलों के गांव बाढ़ की चपेट में
नेपाल में भारी बारिश के बाद गंडक नदी का जलस्तर तेजी से बढ़ा, जिससे बिहार के कई इलाकों में बाढ़ की स्थिति गंभीर हो गई। पश्चिम चंपारण, पूर्वी चंपारण, सारण, गोपालगंज, वैशाली और मुजफ्फरपुर जिलों के कई गांव जलमग्न हो गए हैं। बाढ़ के कारण लोगों को अपने घर छोड़कर सुरक्षित और ऊंचे स्थानों पर जाना पड़ा है।
NASA की अर्थ ऑब्जर्वेटरी ने उपग्रह से ली गई तस्वीरों के आधार पर नदी और उसके आसपास के क्षेत्रों में बाढ़ के विस्तार का आकलन किया है। रिपोर्ट में नदी में असाधारण जलवृद्धि, तटबंधों के ऊपर से पानी बहने और कुछ स्थानों पर तटबंधों को नुकसान पहुंचने का उल्लेख किया गया है।
24 से 27 सितंबर के बीच नेपाल में भारी बारिश
NASA की रिपोर्ट के अनुसार, 24 से 27 सितंबर के बीच नेपाल के लुंबिनी और गंडकी प्रांतों के पहाड़ी क्षेत्रों में भारी बारिश हुई। इसके चलते भूस्खलन की घटनाएं भी हुईं और गंडक नदी में पानी का प्रवाह असाधारण रूप से बढ़ गया।
अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी ने अपनी रिपोर्ट में Terra और Aqua उपग्रहों पर लगे MODIS उपकरणों से प्राप्त तस्वीरों का इस्तेमाल किया है। इन तस्वीरों के जरिए नदी के आसपास बाढ़ से प्रभावित क्षेत्रों की स्थिति का आकलन किया गया।
देवघाट में 11.94 मीटर तक पहुंचा जलस्तर
बिहार के उपमुख्यमंत्री विजय कुमार चौधरी ने 2 अक्टूबर को प्रकाशित NASA की रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि उपग्रह से प्राप्त आंकड़ों ने बाढ़ की गंभीरता को समझने में मदद की है। जल संसाधन विभाग की जिम्मेदारी भी संभाल रहे चौधरी के अनुसार, 20 सितंबर और 29 सितंबर को ली गई उपग्रह तस्वीरों की तुलना से गंडक नदी के आसपास जलमग्न क्षेत्रों के विस्तार का पता चलता है।
उन्होंने बताया कि रिपोर्ट के मुताबिक, नेपाल के देवघाट में 27 सितंबर को गंडक नदी का जलस्तर 11.94 मीटर तक पहुंच गया। वहां 1960 के दशक में जलस्तर की माप शुरू होने के बाद यह सर्वाधिक स्तर बताया गया है।
चौधरी ने कहा कि नदी में असाधारण जलवृद्धि के कारण बाढ़ का पानी बड़े क्षेत्र में फैल गया। कई जगहों पर पानी तटबंधों के ऊपर से बहने लगा, जबकि कुछ स्थानों पर तटबंधों में दरारें भी आईं। वैज्ञानिक और उपग्रह आधारित आंकड़े बाढ़ के फैलाव तथा उसकी गंभीरता का आकलन करने में उपयोगी साबित हो सकते हैं।
हेलीकॉप्टरों से पहुंचाई गई 28 टन से अधिक खाद्य सामग्री
बिहार में बाढ़ प्रभावित लोगों तक राहत पहुंचाने के लिए हवाई अभियान भी चलाया जा रहा है। राज्य के आपदा प्रबंधन विभाग के अनुसार, भारतीय वायुसेना के हेलीकॉप्टरों ने सारण जिले के बाढ़ प्रभावित इलाकों में 15 उड़ानें भरकर सूखे राशन के 5,600 से अधिक पैकेट पहुंचाए। इनके माध्यम से 28 टन से ज्यादा खाद्य सामग्री वितरित की गई।
विभाग ने बताया कि मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के निर्देश पर चलाए गए इस विशेष हवाई राहत अभियान में राज्य सरकार के आपदा प्रबंधन विभाग ने केंद्रीय गृह मंत्रालय और रक्षा मंत्रालय के साथ समन्वय किया।
बिहार में गंडक नदी के बढ़ते जलस्तर और बाढ़ के व्यापक फैलाव के बीच राहत एवं बचाव कार्यों की चुनौती बनी हुई है। NASA की उपग्रह तस्वीरों से बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में पानी के विस्तार को समझने में मदद मिल रही है, जबकि प्रशासन प्रभावित लोगों तक आवश्यक सहायता पहुंचाने में जुटा है।
