रिपोर्ट्स के मुताबिक यह प्रक्रिया CAPTCHA की जगह एक आसान विकल्प के रूप में लाई जा सकती है, लेकिन इसके साथ प्राइवेसी को लेकर चिंताएं भी बढ़ गई हैं। आशंका जताई जा रही है कि QR कोड स्कैन करने के बाद यूजर की डिवाइस और एक्टिविटी डेटा गूगल सिस्टम से लिंक हो सकता है, जिससे यह पता चल सकता है कि यूजर कौन सी वेबसाइट्स विजिट कर रहा है।
हालांकि अभी तक गूगल की ओर से इस फीचर को लेकर कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है। लेकिन टेक कम्युनिटी में चर्चा है कि इसके लिए एंड्रॉयड डिवाइस में गूगल प्ले सर्विस का अपडेटेड वर्जन जरूरी हो सकता है। इससे यह भी सवाल उठ रहा है कि क्या यह सिस्टम वाकई सुरक्षा बढ़ाएगा या यूजर की प्राइवेसी पर असर डालेगा।
कुल मिलाकर, यह नया सिस्टम अगर लागू होता है तो इंटरनेट सिक्योरिटी में बड़ा बदलाव ला सकता है, लेकिन इसके साथ डेटा प्राइवेसी और ट्रैकिंग को लेकर बहस भी तेज होना तय है।
