क्यों बढ़ रही Sovereign Cloud की मांग?
अब क्लाउड सिर्फ डेटा स्टोर करने तक सीमित नहीं रह गया है। यह डेटा कंट्रोल, सुरक्षा और डिजिटल संप्रभुता का बड़ा हिस्सा बन चुका है।दुनिया के कई देश अब बैंकिंग, हेल्थकेयर और सरकारी डेटा को विदेशी कंपनियों के सर्वर पर रखने से बचना चाहते हैं। इसी वजह से यूरोप और एशिया में लोकल क्लाउड इंफ्रास्ट्रक्चर की मांग तेजी से बढ़ रही है।
नॉर्वे की टेलीकॉम कंपनी Telenor ने हाल ही में नई Sovereign Cloud कंपनी शुरू की है। वहीं BT International ने यूरोप में क्लाउड नेटवर्क मजबूत करने के लिए STACKIT के साथ साझेदारी की है।
AI ने बदल दिया पूरा खेल
AI सिस्टम को बड़े डेटा सेंटर, हाई प्रोसेसिंग पावर और तेज नेटवर्क की जरूरत होती है। यही वजह है कि टेलीकॉम कंपनियां अब AI Hosting और Cloud Services में अरबों रुपये निवेश कर रही हैं। विशेषज्ञों के मुताबिक, 5G और स्पेक्ट्रम पर भारी खर्च के बाद अब सिर्फ मोबाइल टैरिफ से कमाई पर्याप्त नहीं रही। इसलिए कंपनियां AI और क्लाउड सर्विसेज को नया रेवेन्यू मॉडल बना रही हैं।
भारत में भी तेजी से बढ़ रहा निवेश
भारत भी डिजिटल संप्रभुता की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। डेटा लोकलाइजेशन और स्वदेशी डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर पर जोर दिया जा रहा है। Bharti Airtel की सब्सिडियरी Nxtra देशभर में बड़े डेटा सेंटर नेटवर्क तैयार कर रही है, जो भविष्य की AI और क्लाउड जरूरतों को पूरा करेंगे।
वहीं Reliance Jio लगातार अपने डिजिटल प्लेटफॉर्म और क्लाउड बिजनेस का विस्तार कर रही है। कंपनी के मुताबिक, JioAICloud के 4.2 करोड़ से ज्यादा ग्राहक हो चुके हैं।
अडानी समूह भी रेस में शामिल
AdaniConneX पूरे भारत में बड़े डेटा सेंटर स्थापित करने की तैयारी में है। अडानी समूह ने Sovereign AI और ऊर्जा क्षेत्र में 100 अरब डॉलर निवेश की योजना का भी ऐलान किया है।
भविष्य की असली जंग अब डेटा पर
विशेषज्ञ मानते हैं कि आने वाले समय में टेलीकॉम सेक्टर की असली ताकत सिर्फ मोबाइल नेटवर्क नहीं, बल्कि AI सिस्टम, डेटा सेंटर और राष्ट्रीय डिजिटल डेटा पर नियंत्रण से तय होगी।
अब टेलीकॉम कंपनियां खुद को सिर्फ नेटवर्क प्रोवाइडर नहीं, बल्कि भविष्य की डिजिटल अर्थव्यवस्था की रीढ़ के तौर पर तैयार कर रही हैं।
