राजेश का डिप्टी कलेक्टर के पद पर चयन क्या हुआ उसके घर आने जाने वालों की लाइन लग गई।
वह लोग भी आये जो कभी इस टूटे फूटे घर की ओर देखते भी नहीं थे।
तमाम पत्रकार आये चैनल वाले आ गए उसका इंटरव्यू लेने,एक चैनल वाले ने राजेश से सवाल किया था आपने कौन सी कोचिंग से तैयारी की है और किसे अपनी सफलता का श्रेय देते हैं ?
राजेश ने सामने टूटी सी टेबल के कौने में रखे एक जर्जर फटे से डिब्बे की ओर इशारा किया और कहा कि यही मेरी कोचिंग है और इसी डिब्बे में रखे मेरे पिता जी के फटे जूते मुझे हमेशा प्रेरित करते रहे हैं… उन्हें तो तमाम अभाव और बीमारियों ने अपना शिकार बना लिया उनके जाने के बाद मैंने उनके फटे जूते संभाल कर रखे.. उन्हें रोज डिब्बे से निकालता और उनके सपनों को साकार करने के लिए लगातार पढ़ाई करता रहा,यही मुझे लगातार समझाइश देते रहे मुझे रोज लगता कि पिता जी मुझसे कह रहे हैं कि बेटा यह फटे जूते नहीं हैं इनमें छुपा अपार परिश्रम का एक एक पल तुम्हारे माध्यम से समाज को एक अच्छा इंसान देने का सपना देखता रहा है।
राजेश ने अब डिब्बे से निकाल कर फटे जूते टेबल पर रख दिए और अपना सिर रख दिया उन जूतों पर।
सतीश श्रीवास्तव
मुंशी प्रेमचंद कालोनी करैरा जिला शिवपुरी(मध्य प्रदेश)
