विदेश मंत्री जयशंकर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर जानकारी साझा करते हुए बताया कि इजरायल के विदेश मंत्री के साथ पश्चिम एशिया की मौजूदा स्थिति को लेकर विस्तृत चर्चा हुई। इस बातचीत में क्षेत्रीय सुरक्षा, तनाव के कारण और संभावित समाधान जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर विचार विमर्श किया गया।
वहीं इजरायली विदेश मंत्री गिदोन सार ने भी इस बातचीत की पुष्टि करते हुए कहा कि भारत के साथ उनकी चर्चा सकारात्मक रही। उन्होंने बताया कि बातचीत में ईरान, होर्मुज जलडमरूमध्य और लेबनान जैसे संवेदनशील मुद्दों पर चर्चा की गई। साथ ही उन्होंने अंतरराष्ट्रीय समुदाय के सहयोग और स्थिरता की आवश्यकता पर भी जोर दिया।
इसी कड़ी में जयशंकर ने ऑस्ट्रेलिया की विदेश मंत्री पेनी वॉन्ग से भी पश्चिम एशिया संकट को लेकर बातचीत की। दोनों नेताओं ने क्षेत्र में शांति और स्थिरता बनाए रखने के लिए सहयोग और संवाद को जरूरी बताया।
दरअसल, हाल ही में डोनाल्ड ट्रंप द्वारा होर्मुज जलडमरूमध्य में नाकेबंदी का ऐलान किए जाने के बाद स्थिति और अधिक संवेदनशील हो गई है। अमेरिका के इस कदम को वैश्विक व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
अमेरिकी सेंट्रल कमांड यानी सेंटकॉम के अनुसार नाकेबंदी लागू कर दी गई है और इसे सख्ती से लागू किया जा रहा है। इस दौरान ईरान के बंदरगाहों से आने जाने वाले जहाजों पर विशेष नजर रखी जा रही है जबकि अन्य देशों के लिए जा रहे जहाजों को कुछ छूट दी गई है।
इस सैन्य अभियान में अमेरिकी नौसेना का अत्याधुनिक युद्धपोत यूएसएस ट्रिपोली भी तैनात किया गया है जहां से एफ 35बी लाइटनिंग स्टील्थ फाइटर जेट और अन्य विमान लगातार निगरानी और संचालन में जुटे हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि होर्मुज जलडमरूमध्य वैश्विक तेल आपूर्ति का एक अहम मार्ग है और यहां किसी भी प्रकार का तनाव पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था को प्रभावित कर सकता है। ऐसे में भारत की यह कूटनीतिक पहल न केवल क्षेत्रीय बल्कि वैश्विक स्तर पर भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
