45 वर्षीय फ्लोरेस ने पेरू के हुआनुको विभाग के पहाड़ी इलाके में स्थित क्वेरोपाल्का जिले में मेयर पद का चुनाव लड़ा था। उन्होंने केंद्रीय-वामपंथी पार्टी ‘आहोरा नासियोन’ के टिकट पर मैदान में उतरकर जीत दर्ज की। चुनाव में उन्हें 229 वोट मिले, जो कुल 663 वैध मतों का 34.5 प्रतिशत है।
फ्लोरेस ने अपने निकटतम प्रतिद्वंद्वी गैस्पर बेनिल्डे ओसोरियो ज़ाम्ब्रानो को केवल 25 वोटों के अंतर से हराया। दक्षिणपंथी पार्टी ‘पॉपुलर रिन्यूअल पेरू’ के उम्मीदवार ओसोरियो को 204 वोट मिले।
730 से कुछ अधिक आबादी वाला जिला, लेकिन चर्चा पूरी दुनिया में
क्वेरोपाल्का पेरू के लौरिकोचा प्रांत में स्थित एक छोटा-सा जिला है। आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, वर्ष 2024 में यहां की आबादी 730 से कुछ अधिक थी। यह इलाका राजधानी लीमा से करीब 360 किलोमीटर दूर है।
इतनी कम आबादी वाले जिले में हुए स्थानीय चुनाव की चर्चा सामान्य तौर पर क्षेत्र तक सीमित रह सकती थी, लेकिन फ्लोरेस के नाम ने इसे अंतरराष्ट्रीय सुर्खियों में ला दिया। उनके नाम के दो हिस्से जर्मनी के एडोल्फ हिटलर और इटली के बेनिटो मुसोलिनी की याद दिलाते हैं। दोनों 20वीं सदी के कुख्यात तानाशाहों में गिने जाते हैं और फासीवादी विचारधारा तथा दमनकारी शासन से जुड़े रहे थे।
हालांकि, किसी व्यक्ति का नाम अपने आप में उसके राजनीतिक विचारों या विचारधारा का प्रमाण नहीं होता। फ्लोरेस की चुनावी जीत को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर दिलचस्पी की प्रमुख वजह भी उनके नाम और ऐतिहासिक तानाशाहों के नामों से उसकी समानता है।
पेरू में पहले भी ‘हिटलर’ नाम वाले नेता बटोर चुके हैं सुर्खियां
पेरू में यह पहला मामला नहीं है, जब किसी नेता के नाम में ‘हिटलर’ शब्द होने के कारण अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चा हुई हो। इससे पहले हिटलर ग्यूस्कलिन अल्बा सांचेज भी अपने नाम को लेकर सुर्खियों में रह चुके हैं। वह केंद्र-दक्षिणपंथी पार्टी ‘वी आर पेरू’ से जुड़े थे और वर्ष 2011 से 2014 तक युंगार शहर के मेयर रहे थे।
अल्बा ने वर्ष 2018 में भी मेयर का चुनाव जीता था। उस समय उनके प्रतिद्वंद्वी लेनिन व्लादिमीर रोड्रिगेज वाल्वरडे ने उनकी उम्मीदवारी की वैधता को चुनौती दी थी।
रिपोर्टों के मुताबिक, अल्बा ने अपने चुनाव प्रचार के दौरान ‘हिटलर रिटर्न्स’ और ‘हिटलर विद द पीपल’ जैसे नारे इस्तेमाल किए थे। उन्होंने खुद को ‘अच्छा हिटलर’ भी बताया था। अल्बा का कहना था कि उनके पिता ने उनका नाम रखते समय नाजी नेता एडोल्फ हिटलर के इतिहास और उसकी विरासत के बारे में जानकारी नहीं रखी थी।
सांसद भी रहे हैं हिटलर नाम वाले नेता
पेरू में हिटलर नाम के एक अन्य नेता भी चर्चा में रहे हैं। हिटलर सावेद्रा पेशे से सर्जन थे और ‘वी आर पेरू’ पार्टी से सांसद बने थे। उन्होंने वर्ष 2021 से 2024 में अपनी मृत्यु तक संसद में काम किया। उनका निधन 46 वर्ष की उम्र में हुआ था।
इन मामलों ने पेरू के कुछ नेताओं के नामों को अंतरराष्ट्रीय मीडिया में बार-बार चर्चा का विषय बनाया है। अब हिटलर मुसोलिनी सिमेओन फ्लोरेस की जीत के बाद एक बार फिर यह सवाल उठ रहा है कि ऐसे ऐतिहासिक रूप से विवादास्पद नाम किसी स्थानीय चुनाव को किस तरह वैश्विक सुर्खियों तक पहुंचा सकते हैं।
