ढाका में आयोजित एक निजी चर्चा के दौरान भारत के उच्चायुक्त दिनेश त्रिवेदी से शेख हसीना के प्रत्यर्पण को लेकर बांग्लादेश की ओर से लगातार की जा रही मांगों के बारे में सवाल पूछा गया। इसके जवाब में उन्होंने कहा कि हसीना की वापसी की समयसीमा के बारे में अभी कुछ नहीं कहा जा सकता। उन्होंने स्पष्ट किया कि बांग्लादेश से मिले प्रत्यर्पण अनुरोध पर फिलहाल कानूनी प्रक्रिया के तहत विचार किया जा रहा है और भारत इस मामले को निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार देख रहा है।
भारत को बांग्लादेश की ओर से शेख हसीना को वापस भेजने का औपचारिक अनुरोध मिल चुका है। इस अनुरोध की कानूनी समीक्षा वर्तमान में जारी है। भारत की ओर से यह संकेत दिया गया है कि मामले में किसी तरह की समयसीमा पहले से तय नहीं की जा सकती। प्रत्यर्पण से संबंधित निर्णय कानूनी प्रक्रिया और उपलब्ध प्रावधानों के आधार पर लिया जाएगा। इस दौरान भारत की ओर से मामले को न्यायिक और कूटनीतिक प्रक्रिया के दायरे में रखा गया है।
शेख हसीना अगस्त 2024 में बांग्लादेश में पैदा हुए राजनीतिक संकट के बीच अचानक देश छोड़कर भारत आई थीं। उस समय बांग्लादेश में परिस्थितियां तेजी से बिगड़ रही थीं। हसीना उस समय देश की प्रधानमंत्री थीं और उनकी सरकार के खिलाफ बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन चल रहे थे। इसी राजनीतिक घटनाक्रम के बीच उनकी सरकार गिर गई और वह भारत आ गईं। भारत की ओर से उस समय कहा गया था कि तेजी से बिगड़ते हालात के बीच हसीना को भारत में आने की अनुमति देने के अलावा बहुत कम विकल्प मौजूद थे।
भारत का कहना है कि उस समय हसीना को भारत आने की अनुमति देना सीमा पार बढ़ते संकट के बीच स्थिरता बनाए रखने के लिहाज से जरूरी था। इसके बाद बांग्लादेश में राजनीतिक स्थिति बदली और अब वहां तारिक रहमान के नेतृत्व वाली सरकार है। इस बदले राजनीतिक परिदृश्य के बीच शेख हसीना के प्रत्यर्पण की मांग बांग्लादेश की ओर से लगातार की जा रही है।
ढाका में बंगाल की खाड़ी संवाद 2026 के दौरान भी भारतीय उच्चायुक्त से इसी मुद्दे पर सवाल किया गया। उन्होंने दोहराया कि भारत फिलहाल हसीना की वापसी के लिए कोई निश्चित समयसीमा नहीं बता सकता। उनका कहना था कि प्रत्यर्पण अनुरोध कानूनी प्रक्रिया से गुजर रहा है। ऐसे में आगे की कार्रवाई तय प्रक्रिया के अनुसार ही होगी और फिलहाल उनकी वापसी की कोई डेडलाइन निर्धारित नहीं है।
