युद्ध में कम इस्तेमाल क्यों हुआ Iron Beam?
इजरायली वायुसेना (IAF) ने अब इस पर सफाई देते हुए बताया है कि Iron Beam के सीमित इस्तेमाल की सबसे बड़ी वजह सिस्टम की पूरी तैनाती क्षमता का अधूरा होना और बैटरियों की कमी है।
IAF के मुताबिक, इस लेजर सिस्टम को प्रभावी ढंग से काम करने के लिए करीब 14 पूरी बैटरियों के नेटवर्क की जरूरत होती है, जबकि युद्ध के समय यह पूरी क्षमता में उपलब्ध नहीं था। इसी वजह से इसे बड़े पैमाने पर ऑपरेशनल रोल में नहीं लाया जा सका।
पूरी तरह तैयार नहीं था सिस्टम
रिपोर्ट्स के अनुसार, युद्ध के दौरान इजरायली सेना ने खुद माना कि Iron Beam अभी “फुल ऑपरेशनल फेज” में नहीं पहुंचा था। यानी इसे तैनात तो किया गया था, लेकिन यह हर तरह के हवाई खतरे के लिए पूरी तरह तैयार नहीं था।इसी बीच रक्षा मंत्रालय और रक्षा कंपनी राफेल (Rafael Advanced Defense Systems) ने भी तकनीकी विवरणों पर ज्यादा टिप्पणी करने से बचाव किया था, जिससे संदेह और बढ़ गया।
Iron Beam आखिर क्या करता है?
Iron Beam एक हाई-एनर्जी लेजर डिफेंस सिस्टम है, जिसे कम दूरी के हवाई खतरों को नष्ट करने के लिए डिजाइन किया गया है। इसमें खास तौर पर शामिल हैं
ड्रोन
रॉकेट
मोर्टार शेल
छोटे एयर अटैक थ्रेट्स
इस सिस्टम की सबसे बड़ी खासियत इसकी लो-कॉस्ट इंटरसेप्शन क्षमता है। जहां मिसाइल डिफेंस सिस्टम में एक इंटरसेप्टर पर लाखों डॉलर खर्च होते हैं, वहीं Iron Beam में लेजर फायरिंग की लागत बेहद कम मानी जाती है।
क्यों इसे “भविष्य की टेक्नोलॉजी” कहा जाता है?
इजरायल ने पहले दावा किया था कि Iron Beam ने 2024 में हिजबुल्लाह के करीब 40 ड्रोन को सफलतापूर्वक मार गिराया था। इसके बाद इसे अगले स्तर की एयर डिफेंस तकनीक माना गया।हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि यह सिस्टम अभी भी शुरुआती चरण में है और इसे पूरी तरह से Iron Dome जैसे स्थापित सिस्टम की जगह लेने में कई साल लग सकते हैं।
बड़ी चुनौती क्या है?
विशेषज्ञों के अनुसार, लेजर सिस्टम की सबसे बड़ी सीमाएं हैं
मौसम का असर (धुंध, बादल, धूल)
लंबी दूरी के बैलिस्टिक मिसाइल खतरे
लगातार पावर सप्लाई की जरूरत
इन्हीं कारणों से Iron Beam को अभी “सपोर्ट सिस्टम” के तौर पर देखा जा रहा है, न कि पूरी तरह स्वतंत्र डिफेंस शील्ड के रूप में।इजरायल का लक्ष्य है कि आने वाले वर्षों में Iron Beam को बड़े स्तर पर तैनात किया जाए और इसे Iron Dome के साथ इंटीग्रेट किया जाए। लेकिन मौजूदा स्थिति साफ बताती है कि यह तकनीक अभी ट्रांजिशन फेज में है।
Iron Beam ने भविष्य की रक्षा तकनीक की दिशा जरूर दिखाई है, लेकिन ईरान संघर्ष ने यह भी साफ कर दिया कि यह सिस्टम अभी पूरी तरह तैयार नहीं है। इजरायल इसे मजबूत करने में जुटा है, लेकिन युद्ध में इसका सीमित रोल इसकी मौजूदा सीमाओं को उजागर करता है।
