शिवपुरी। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के संघ शिक्षा वर्ग (विद्यार्थी) प्रथम वर्ष के अंतर्गत शुक्रवार सायंकाल फतेहपुर रोड स्थित सरस्वती शिशु मंदिर परिसर में आयोजित मातृहस्त भोजन कार्यक्रम आत्मीयता, पारिवारिक संस्कार और सामाजिक समरसता का अद्भुत उदाहरण बन गया। कार्यक्रम में नगर के 268 परिवारों की मातृशक्ति ने उत्साहपूर्वक सहभागिता करते हुए 450 शिक्षार्थियों के लिए अपने हाथों से प्रेमपूर्वक भोजन तैयार कर लाया और स्वयं उनके साथ बैठकर भोजन ग्रहण किया।
कार्यक्रम के दौरान पूरा परिसर भारतीय संस्कृति की पारिवारिक परंपराओं, स्नेह और अपनत्व के भाव से ओतप्रोत दिखाई दिया। माताओं द्वारा घरों से विभिन्न प्रकार के स्वादिष्ट व्यंजन, भोजन सामग्री एवं आवश्यक बर्तन लाए गए। शिक्षार्थियों को मातृस्नेह के साथ भोजन परोसा गया, जिससे वातावरण में परिवार जैसी आत्मीयता का अनुभव हुआ।
इस अवसर पर क्षेत्र प्रचारक प्रमुख शिवराम समदरिया ने अपने उद्बोधन में संत शिरोमणि संत रविदास जी के जीवन प्रसंगों का उल्लेख करते हुए समाज में समरसता, सेवा और संस्कारों के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति में परिवार केवल संबंधों का समूह नहीं, बल्कि संस्कारों की प्रथम पाठशाला है, जहां से व्यक्ति के चरित्र और जीवन मूल्यों का निर्माण होता है।
उन्होंने कुटुंब प्रबोधन, सामाजिक उत्तरदायित्व तथा पर्यावरण संरक्षण जैसे विषयों पर भी विस्तार से विचार व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि सशक्त और संस्कारित परिवार ही सुदृढ़ समाज और राष्ट्र निर्माण की आधारशिला हैं। साथ ही प्रत्येक परिवार से वृक्षारोपण एवं प्रकृति संरक्षण के लिए सक्रिय योगदान देने का आह्वान किया।
मातृहस्त भोजन कार्यक्रम ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की पारिवारिक एवं सांस्कृतिक अवधारणा को साकार रूप प्रदान करते हुए समाज में आत्मीयता, संस्कार, समरसता और राष्ट्रभावना का प्रेरक संदेश दिया।
