उमरिया– उमरिया जिले के आदिवासी बाहुल्य जनपद पंचायत पाली में केंद्र सरकार द्वारा आवंटित 11 निजी कोल ब्लॉकों के खिलाफ स्थानीय किसानों का गुस्सा फूट पड़ा है। निजी कोल कंपनियों द्वारा किए जा रहे भूमि अधिग्रहण और कथित अनियमितताओं से नाराज किसानों ने ‘भारतीय किसान संघ’ के बैनर तले कलेक्टर को प्रमुख सचिव के नाम एक 24 सूत्रीय चेतावनी भरा ज्ञापन सौंपा है। किसानों ने साफ चेतावनी दी है कि यदि 30 दिनों के भीतर उनकी मांगें पूरी नहीं हुईं, तो वे उग्र आंदोलन के लिए मजबूर होंगे।30 दिन बाद ‘घेरा डालो-डेरा डालो’ आंदोलन की चेतावनीसौंपे गए ज्ञापन में भारतीय किसान संघ ने प्रशासन को अल्टीमेटम दिया है। संघ का कहना है कि यदि तय समय सीमा में किसानों की समस्याओं का निराकरण नहीं किया गया, तो वे ‘घेरा डालो-डेरा डालो’ आंदोलन शुरू करेंगे। इसके तहत शहडोल-घुनघुटी राष्ट्रीय राजमार्ग को पूरी तरह से बंद कर दिया जाएगा। इतना ही नहीं, आंदोलन के दौरान आम जनता को सप्लाई होने वाली आवश्यक वस्तुएं जैसे दूध, फल और सब्जी की आपूर्ति भी रोक दी जाएगी, जिसकी पूरी जिम्मेदारी शासन और प्रशासन की होगी।रात के अंधेरे में शराब पिलाकर हस्ताक्षर कराने के आरोपभारतीय किसान संघ के जिला अध्यक्ष अभिषेक अग्रवाल ने स्थानीय प्रशासन और कोल कंपनियों के गठजोड़ पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा, “क्षेत्र में कोल माइनिंग शुरू होने से कई तरह की अनियमितताएं सामने आ रही हैं। कालरी प्रशासन के अधिकारी रात के अंधेरे में ग्रामीणों को शराब पिलाकर अनावश्यक कागजातों पर हस्ताक्षर करवा रहे हैं और रात में ही नोटिस बांटे जा रहे हैं। इस खेल में स्थानीय अधिकारियों की भी मिलीभगत है। हमने पहले भी कई बार ज्ञापन दिया, लेकिन प्रशासन ने हर बार इसे अनदेखा कर दिया, जिससे ऐसा लगता है कि कंपनियों को प्रशासन की मौन स्वीकृति मिली हुई है।” संघ ने इस पूरे मामले की उच्च स्तरीय जांच और उचित बैठक कर निर्णय लेने की मांग की है।तहसीलदार ने लिया ज्ञापन, मालाचुआ और घुनघुटी क्षेत्र का है मामलाकलेक्टर की अनुपस्थिति में ज्ञापन लेने पहुंचे बांधवगढ़ के तहसीलदार दिलीप सोनी ने बताया कि भारतीय किसान संघ उमरिया द्वारा एक शिकायत पत्र सौंपा गया है। यह मामला मुख्य रूप से मालाचुआ और घुनघुटी क्षेत्र में शुरू होने जा रही कोल माइंस की तैयारियों से जुड़ा हुआ है। किसानों ने माइनिंग प्रक्रिया और भूमि अधिग्रहण को लेकर 24 बिंदुओं पर अपनी आपत्तियां दर्ज कराई हैं, जिन्हें संबंधित उच्च अधिकारियों तक भेजा जा रहा है।ओपन कास्ट से अंडरग्राउंड माइंस का ‘बड़ा खेल’स्थानीय सूत्रों और रिपोर्ट के अनुसार, पूर्व में पाली ब्लॉक के अंतर्गत इन खदानों को ‘खुली खदान’ (Open Cast Mine) के रूप में शुरू करने की स्वीकृति मिली थी। हालांकि, वन विभाग (Forest Department) द्वारा अनापत्ति प्रमाण पत्र (NOC) न दिए जाने के कारण पेंच फंस गया था। इसके बाद कोल कंपनियों ने कथित तौर पर एक बड़ा फेरबदल करते हुए सभी कोल माइंस को ‘अंडरग्राउंड’ (Underground Mines) में तब्दील करवा लिया और अब खदानें चालू करने की पूरी तैयारी कर ली है। इस अप्रत्याशित बदलाव के कारण क्षेत्र के सैकड़ों किसान और ग्रामीण पूरी तरह से भूमिहीन और बेरोजगार होने की कगार पर पहुंच गए हैं।
