शिवपुरी, 19 अगस्त 2026। जिले में नशे के बढ़ते प्रभाव पर अंकुश लगाने और विशेषकर युवाओं को नशे की गिरफ्त से बचाने के लिए प्रशासन ने सख्त रुख अपनाया है। नारकोटिक्स एवं नशीले पदार्थों की रोकथाम के लिए गठित समिति की समीक्षा बैठक कलेक्टर एवं जिला मजिस्ट्रेट अर्पित वर्मा की अध्यक्षता में आयोजित हुई। बैठक में पुलिस अधीक्षक यांगचेन डोलकर भूटिया सहित विभिन्न विभागों के जिला अधिकारी मौजूद रहे।
बैठक में कलेक्टर अर्पित वर्मा ने स्कूलों और शैक्षणिक संस्थानों के आसपास संचालित धूम्रपान सामग्री एवं नशीले पदार्थों की दुकानों को तत्काल हटाने के निर्देश दिए। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि बच्चों और विद्यार्थियों को नशे की ओर धकेलने वाली किसी भी गतिविधि को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
कलेक्टर ने कम उम्र में बच्चों में बढ़ रही नशे की प्रवृत्ति पर चिंता जताते हुए स्कूल शिक्षा विभाग को जिले के सभी विद्यालयों में व्यापक जागरूकता अभियान चलाने के निर्देश दिए। विद्यार्थियों को नशीले पदार्थों के शारीरिक, मानसिक और सामाजिक दुष्प्रभावों की जानकारी देकर उन्हें नशे से दूर रखने के लिए प्रभावी प्रयास करने को कहा गया।
मेडिकल स्टोर से लेकर ढाबों तक होगी निगरानी
कलेक्टर ने ड्रग इंस्पेक्टर और आबकारी विभाग को मेडिकल स्टोर, मदिरा दुकानों तथा हाईवे किनारे संचालित ढाबों का लगातार निरीक्षण करने के निर्देश दिए। प्रतिबंधित दवाओं अथवा अवैध नशीले पदार्थों की बिक्री पाए जाने पर प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित करने को कहा गया।
उन्होंने यह भी निर्देश दिए कि जिले में संचालित नशा मुक्ति केंद्रों का समय-समय पर निरीक्षण किया जाए और वहां व्यवस्थाओं की निगरानी रखी जाए।
विभागों के बीच बेहतर समन्वय पर जोर
कलेक्टर ने कहा कि नशे के खिलाफ लड़ाई केवल एक विभाग की जिम्मेदारी नहीं है। पुलिस, प्रशासन, शिक्षा, आबकारी, स्वास्थ्य एवं अन्य संबंधित विभागों को आपसी समन्वय के साथ अभियान चलाना होगा। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि नशे के कारोबार और इसके प्रसार के खिलाफ कड़ी, निरंतर और ठोस कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।
बैठक से साफ है कि जिला प्रशासन अब स्कूल-कॉलेजों के आसपास नशे की सामग्री की बिक्री, प्रतिबंधित दवाओं के दुरुपयोग और अवैध ड्रग्स के कारोबार पर शिकंजा कसने की तैयारी में है।
