मंत्री के अनुसार इस एफटीए के तहत भारत से न्यूजीलैंड निर्यात होने वाले अधिकांश उत्पादों पर अब शून्य शुल्क लागू होगा इससे भारतीय कंपनियों को अंतरराष्ट्रीय बाजार में प्रतिस्पर्धात्मक बढ़त मिलेगी और निर्यात में तेजी आएगी खासतौर पर छोटे और मध्यम उद्यमों को इससे बड़ा फायदा मिलने की उम्मीद जताई जा रही है
पीयूष गोयल ने बताया कि इस समझौते के जरिए न्यूजीलैंड का बाजार भारत के लिए करीब 140 सेवा क्षेत्रों में खुल गया है इसमें शिक्षा खेल संस्कृति कृषि उत्पादकता और तकनीकी सहयोग जैसे महत्वपूर्ण सेक्टर शामिल हैं उन्होंने कहा कि दोनों देशों के बीच बौद्धिक संपदा और पारंपरिक चिकित्सा विशेष रूप से आयुष से जुड़े क्षेत्रों में भी सहयोग को बढ़ावा मिलेगा
फार्मास्यूटिकल सेक्टर को लेकर उन्होंने इसे बेहद अहम करार दिया मंत्री ने बताया कि यदि भारत में बनी कोई दवा पहले से अमेरिका या यूरोप जैसे विकसित देशों में स्वीकृत है तो न्यूजीलैंड में उसे तेज प्रक्रिया के जरिए मंजूरी मिल सकेगी इससे भारतीय दवा कंपनियों के लिए वैश्विक बाजार में प्रवेश आसान होगा और उनकी पहुंच मजबूत होगी
निवेश के क्षेत्र में भी इस समझौते को गेम चेंजर माना जा रहा है मंत्री के अनुसार पिछले 25 वर्षों में न्यूजीलैंड ने भारत में करीब 70 मिलियन डॉलर का निवेश किया है लेकिन अब अगले 15 वर्षों में लगभग 20 बिलियन डॉलर का निवेश करने की योजना बनाई जा रही है यह निवेश देश में उद्योगों के विस्तार और रोजगार सृजन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा
उन्होंने यह भी बताया कि इस समझौते को जल्द ही न्यूजीलैंड की संसद में पेश किया जाएगा जहां इसे सत्तारूढ़ और विपक्षी दलों का समर्थन मिल रहा है ऐसे में उम्मीद जताई जा रही है कि इसे मंजूरी मिलने के बाद इस वर्ष के अंत तक लागू कर दिया जाएगा
पीयूष गोयल ने कहा कि यह एफटीए भारत के विकसित भारत 2047 के लक्ष्य को हासिल करने में अहम भूमिका निभाएगा और अमृत काल के दौरान देश की आर्थिक प्रगति को नई गति प्रदान करेगा उन्होंने भरोसा जताया कि यह समझौता दोनों देशों के बीच संबंधों को और मजबूत करेगा और व्यापारिक साझेदारी को नए आयाम देगा
