स्थानीय लोगों का कहना है कि पिछले कुछ दिनों से क्षेत्र में सीवरेज लाइन का काम चल रहा था, लेकिन निर्माण कार्य के दौरान भारी लापरवाही बरती गई। धरना स्थल पर पहुंचे नगर पालिका के नेता प्रतिपक्ष राकेश सिंह जाधव ने प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि सीवरेज कार्य के दौरान मुख्य पेयजल लाइन को नुकसान पहुंचा दिया गया, जिसके चलते यह स्थिति बनी है। उन्होंने स्पष्ट कहा कि नियमों के अनुसार पेयजल और सीवरेज पाइपलाइन को साथ में नहीं डाला जा सकता, लेकिन यहां नियमों की अनदेखी करते हुए काम किया गया है।
वार्ड नंबर 14 के पार्षद प्रतिनिधि हेमंत कुमावत ने भी प्रशासन की कार्यशैली पर सवाल उठाए। उनका कहना था कि दूषित पानी की समस्या की जानकारी एक दिन पहले ही अधिकारियों को दे दी गई थी, लेकिन समय पर कोई कार्रवाई नहीं की गई। इसके चलते अब हालात ऐसे बन गए हैं कि क्षेत्र में महामारी और जलजनित बीमारियों का खतरा तेजी से बढ़ गया है। लोगों में इस बात को लेकर भी नाराजगी है कि जिम्मेदार अधिकारी शिकायतों को गंभीरता से नहीं ले रहे और केवल आश्वासन देकर मामले को टालने की कोशिश कर रहे हैं।
जैसे ही प्रदर्शन की सूचना प्रशासन तक पहुंची, नगर पालिका के इंजीनियर और वरिष्ठ अधिकारी मौके पर पहुंचे और स्थिति का जायजा लिया। अधिकारियों ने प्रदर्शनकारियों से बातचीत कर उन्हें भरोसा दिलाया कि समस्या का जल्द समाधान किया जाएगा। साथ ही संबंधित ठेकेदार को तत्काल लीकेज ठीक करने के निर्देश भी दिए गए। इसके बाद कुछ हद तक स्थिति शांत हुई, लेकिन लोगों का गुस्सा पूरी तरह ठंडा नहीं पड़ा है।
पार्षदों और स्थानीय निवासियों ने साफ चेतावनी दी है कि यदि समस्या का स्थायी समाधान नहीं हुआ और दोषियों पर कार्रवाई नहीं की गई, तो आने वाले दिनों में आंदोलन और उग्र किया जाएगा। फिलहाल प्रशासन की टीम सुधार कार्य में जुटी हुई है, लेकिन यह घटना एक बार फिर शहरी विकास कार्यों में लापरवाही और निगरानी की कमी को उजागर करती है, जिससे आम नागरिकों को सीधे तौर पर परेशानियों का सामना करना पड़ता है।
