प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक दोपहर के समय स्कूल भवन से अचानक धुआं उठता दिखाई दिया। शुरुआत में किसी को अंदाजा नहीं था कि यह आग इतनी तेजी से फैल जाएगी लेकिन देखते ही देखते कंप्यूटर लैब में आग ने विकराल रूप ले लिया। लैब में रखे दर्जनों कंप्यूटर फर्नीचर और जरूरी शैक्षणिक दस्तावेज पूरी तरह जलकर खाक हो गए। इससे स्कूल के संचालन और छात्रों के रिकॉर्ड पर भी बड़ा असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है।
घटना की सूचना मिलते ही नगर निगम की दमकल टीम मौके पर पहुंची। पहले एक फायर ब्रिगेड वाहन भेजा गया लेकिन आग की तीव्रता को देखते हुए अतिरिक्त वाहन भी बुलाए गए। दमकल कर्मियों ने काफी मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया और बड़े हादसे को टालने में सफलता हासिल की। यदि समय रहते आग पर नियंत्रण नहीं पाया जाता तो यह और भी बड़े हिस्से को नुकसान पहुंचा सकती थी।
इस हादसे ने स्कूल प्रशासन के सुरक्षा इंतजामों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय लोगों और अभिभावकों का आरोप है कि स्कूल में फायर सेफ्टी के पर्याप्त इंतजाम नहीं थे। कई उपकरण या तो काम नहीं कर रहे थे या उनकी संख्या बेहद कम थी। इसी कारण आग तेजी से फैलती चली गई और उसे शुरुआती स्तर पर नियंत्रित नहीं किया जा सका।
सबसे चिंताजनक पहलू यह रहा कि आग लगने के दौरान आपातकालीन निकास व्यवस्था और बचाव प्रक्रिया भी प्रभावी नजर नहीं आई। स्टाफ के पास ऐसी स्थिति से निपटने के लिए पर्याप्त प्रशिक्षण या संसाधन नहीं थे जिससे स्थिति और बिगड़ सकती थी। हालांकि सौभाग्य से उस समय सभी छात्र सुरक्षित बाहर निकाल लिए गए और कोई जनहानि नहीं हुई।
प्राथमिक जांच में आग लगने का कारण शॉर्ट सर्किट माना जा रहा है लेकिन पुलिस और प्रशासन ने मामले की विस्तृत जांच शुरू कर दी है। कुठला थाना पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि आखिर सुरक्षा मानकों में कहां चूक हुई और इसके लिए जिम्मेदार कौन है।
यह घटना एक बार फिर यह याद दिलाती है कि स्कूल जैसे संवेदनशील स्थानों पर सुरक्षा मानकों से कोई समझौता नहीं होना चाहिए। बच्चों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए और इसके लिए नियमित निरीक्षण और अपडेटेड फायर सेफ्टी सिस्टम अनिवार्य हैं। अब देखना होगा कि इस हादसे के बाद प्रशासन क्या सख्त कदम उठाता है ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।
