जानकारी के मुताबिक, कमर्शियल सिलेंडर की कीमत 2081 रुपए से बढ़कर सीधे 3074 रुपए हो गई है। यानी करीब 993 रुपए की बढ़ोतरी ने ईंधन लागत को डेढ़ गुना तक बढ़ा दिया है। इसका सीधा असर अब खाने-पीने की कीमतों पर पड़ने वाला है। होटल और रेस्टोरेंट संचालकों का कहना है कि अब मेन्यू के दाम 25 से 30 फीसदी तक बढ़ाना मजबूरी हो गया है।
कारोबारियों के अनुसार, पहले जहां गैस पर मासिक खर्च करीब 2 लाख रुपए होता था, अब यह बढ़कर 3 से सवा 3 लाख रुपए तक पहुंच सकता है। छोटे कारोबारियों की हालत और भी खराब है। 5 किलो वाले छोटे सिलेंडर (छोटू) की कीमत 585 रुपए से बढ़कर 827 रुपए हो गई है, जिससे हॉकर और स्ट्रीट फूड विक्रेताओं पर सीधा असर पड़ा है।
इस बढ़ोतरी का असर शादी-विवाह जैसे आयोजनों पर भी साफ दिखाई देने लगा है। कैटरर्स का कहना है कि पहले से बुक किए गए ऑर्डर्स में उन्हें नुकसान झेलना पड़ेगा, क्योंकि पुराने रेट पर ही काम करना होगा। एक शादी में औसतन 10 सिलेंडर खर्च होते हैं, जिससे प्रति इवेंट करीब 10 हजार रुपए का अतिरिक्त बोझ पड़ रहा है। आने वाले ऑर्डर्स में प्रति प्लेट 50 रुपए तक बढ़ोतरी की तैयारी की जा रही है।
विशेषज्ञों के अनुसार, 500 लोगों के एक आयोजन का 5 लाख रुपए का बजट अब 45 से 50 हजार रुपए तक बढ़ सकता है। इससे साफ है कि महंगाई की यह मार सिर्फ कारोबारियों तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि आम लोगों की जेब पर भी असर डालेगी।
आंकड़ों पर नजर डालें तो 1 अप्रैल 2025 के बाद से अब तक कमर्शियल सिलेंडर के दाम 16 बार बदले जा चुके हैं। इनमें 8 बार बढ़ोतरी और 6 बार कमी दर्ज की गई है। सबसे बड़ी बढ़ोतरी 1 मई को हुई, जिसने बाजार का पूरा संतुलन बिगाड़ दिया।
कुल मिलाकर, गैस की किल्लत और बढ़ती कीमतों ने भोपाल के फूड इंडस्ट्री सेक्टर को मुश्किल में डाल दिया है। आने वाले दिनों में बाहर खाना अब पहले से काफी महंगा हो सकता है, जिसका सीधा असर आम जनता के बजट पर पड़ेगा।
