दरअसल हर पार्सल पर लगा शिपिंग लेबल आपके नाम, मोबाइल नंबर, घर के पते और ऑर्डर डिटेल्स जैसी संवेदनशील जानकारी से भरा होता है। लोग बिना इसे हटाए या मिटाए बॉक्स फेंक देते हैं और यहीं से ठगों का खेल शुरू होता है। ये जालसाज कूड़े से ऐसे बॉक्स इकट्ठा कर लेते हैं और लेबल से पूरी जानकारी निकाल लेते हैं।
इसके बाद ठग आपको कॉल करते हैं और खुद को ई-कॉमर्स कंपनी का कस्टमर केयर या फीडबैक एजेंट बताते हैं। चूंकि उनके पास पहले से आपका सही नाम और पता होता है, इसलिए उनकी बातों पर भरोसा करना आसान हो जाता है। बातचीत के दौरान वे कैशबैक, ऑफर या रिवॉर्ड का लालच देकर एक लिंक भेजते हैं। जैसे ही आप उस लिंक पर क्लिक करते हैं, आपका फोन हैक हो सकता है या आप फर्जी वेबसाइट पर पहुंच जाते हैं, जहां से ओटीपी , बैंक डिटेल्स और लॉगिन जानकारी चुरा ली जाती है।
सेल के दौरान ऐसे मामलों में तेजी इसलिए आती है क्योंकि ज्यादा ऑर्डर का मतलब ज्यादा फेंके गए बॉक्स और ठगों के पास ज्यादा डेटा। साथ ही, इस समय लोग ऑफर्स और कॉल्स की उम्मीद में रहते हैं, जिसका फायदा उठाकर स्कैमर्स आसानी से जाल बिछाते हैं।
इस खतरे से बचना मुश्किल नहीं, बस थोड़ी सावधानी जरूरी है। पार्सल बॉक्स फेंकने से पहले हमेशा शिपिंग लेबल को फाड़ दें या मार्कर से अपनी जानकारी पूरी तरह मिटा दें। किसी भी अनजान लिंक पर क्लिक करने से बचें और फोन पर कभी भी ओटीपी या बैंक डिटेल्स साझा न करें। अगर कोई कॉलर ऑफर या कैशबैक का लालच दे, तो पहले उसकी सच्चाई जांच लें।
याद रखें, आपकी एक छोटी सी लापरवाही साइबर ठगों के लिए बड़ा मौका बन सकती है। इसलिए अगली बार पार्सल खोलने के बाद डिब्बा फेंकने से पहले अपनी जानकारी जरूर सुरक्षित करें।
