दरअसल, कंपनियों ने 5G नेटवर्क तैयार करने में हजारों करोड़ रुपये खर्च किए हैं। अब वे उसी निवेश से ज्यादा कमाई के नए रास्ते तलाश रही हैं। ऐसे में नेटवर्क स्लाइसिंग को 5G का अगला बड़ा कदम माना जा रहा है।
क्या है Network Slicing?
आसान भाषा में समझें तो Network Slicing का मतलब है एक ही 5G नेटवर्क को कई हिस्सों में बांटना। हर हिस्से यानी “स्लाइस” को अलग जरूरत के हिसाब से तैयार किया जा सकता है।
उदाहरण के तौर पर एक स्लाइस हाई-स्पीड गेमिंग के लिए बनाया जा सकता है।दूसरा 4K या 8K वीडियो स्ट्रीमिंग के लिए।तीसरा फैक्ट्री ऑटोमेशन या स्मार्ट मशीनों के लिए।वहीं अस्पतालों और एंटरप्राइज कंपनियों के लिए अलग सुपर-स्टेबल नेटवर्क दिया जा सकता है।यानी एक ही 5G नेटवर्क पर अलग-अलग क्वालिटी और स्पीड की सर्विस मिलेगी।
क्या आम यूजर्स को होगा फायदा?
अगर यह तकनीक लागू होती है तो प्रीमियम यूजर्स को ज्यादा स्थिर और तेज इंटरनेट मिल सकता है। गेमिंग, लाइव स्ट्रीमिंग और वीडियो कॉलिंग जैसी सेवाएं पहले से ज्यादा स्मूद हो सकती हैं।
हालांकि बड़ा सवाल यही है कि क्या इसके लिए लोगों को ज्यादा पैसे चुकाने पड़ेंगे? माना जा रहा है कि कंपनियां “VIP 5G” या “Premium 5G” नाम से महंगे प्लान ला सकती हैं। ऐसे में हाई-स्पीड और लो-लेटेंसी नेटवर्क सिर्फ ज्यादा कीमत देने वाले ग्राहकों को मिल सकता है।
बिजनेस सेक्टर को सबसे ज्यादा फायदा
रिपोर्ट्स के अनुसार Network Slicing का सबसे बड़ा फायदा बिजनेस और एंटरप्राइज सेक्टर को होगा। फैक्ट्रियों, अस्पतालों, क्लाउड कंपनियों और ऑटोमेशन इंडस्ट्री को ऐसा नेटवर्क चाहिए होता है जिसमें कोई रुकावट न आए और डेटा ट्रांसफर बेहद तेज हो।ऐसे में कंपनियां उन्हें डेडिकेटेड 5G नेटवर्क उपलब्ध करा सकती हैं, जिससे मशीनें और सिस्टम बिना लैग के काम कर सकें।
भारत में क्यों फंसा है मामला?
हालांकि चीन और फिनलैंड जैसे देशों में स्पीड बेस्ड इंटरनेट प्लान पहले से मौजूद हैं, लेकिन भारत में मामला इतना आसान नहीं है। मौजूदा नियमों के तहत अलग-अलग स्पीड या प्राथमिकता देना “नेटवर्क भेदभाव” माना जा सकता है।
यही वजह है कि ट्राई और दूरसंचार विभाग (DoT) की मंजूरी के बिना कंपनियां इसे लागू नहीं कर सकतीं। फिलहाल Jio और Airtel सरकार से स्पष्ट नियमों का इंतजार कर रहे हैं।
यूजर्स के लिए चिंता या मौका?
अगर प्रीमियम 5G आता है तो कुछ यूजर्स को शानदार इंटरनेट अनुभव मिलेगा, लेकिन इससे इंटरनेट सेवाएं महंगी होने का डर भी बढ़ सकता है। आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि भारतीय ग्राहक बेहतर स्पीड और एक्सक्लूसिव नेटवर्क के लिए ज्यादा पैसे खर्च करने को तैयार होते हैं या नहीं।
