रिपोर्ट्स के मुताबिक भारतीय मालवाहक जहाज ‘MV गौतम’ ओमान से भारत लौटते समय तकनीकी खराबी के कारण अरब सागर में फंस गया था। इसके बाद मुंबई स्थित समुद्री बचाव समन्वय केंद्र ने पाकिस्तान से सहायता मांगी। जवाब में पाकिस्तानी नौसेना ने ‘PMSS कश्मीर’ नाम के जहाज को राहत मिशन के लिए रवाना किया।
बचाव अभियान या कूटनीतिक संदेश?
पाकिस्तान ने जहाज के चालक दल को भोजन, मेडिकल सहायता और जरूरी मदद पहुंचाई। जहाज में छह भारतीय और एक इंडोनेशियाई नागरिक सवार थे। हालांकि इस पूरे घटनाक्रम में सबसे ज्यादा चर्चा उस जहाज के नाम को लेकर हुई, जिसे पाकिस्तान ने जानबूझकर कश्मीर नाम दिया है।
विश्लेषकों का मानना है कि पाकिस्तान मानवीय मदद के साथ-साथ कश्मीर शब्द को अंतरराष्ट्रीय मीडिया और वैश्विक चर्चा में बनाए रखने की रणनीति पर काम करता है। पाकिस्तान पहले भी अपने कई अभियानों और मंचों पर कश्मीर मुद्दे को प्रमुखता से उठाता रहा है।
पहले भी सामने आ चुका है मामला
रिपोर्ट्स के अनुसार फरवरी 2024 में भी इसी ‘PMSS Kashmir’ जहाज ने अरब सागर में फंसे भारतीय नागरिकों को बचाया था। पाकिस्तान ने उस समय भी इसे मानवीय मिशन के साथ अपने राजनीतिक संदेश से जोड़कर पेश किया था।
In a remarkable act of maritime humanitarianism amid tense India-Pakistan relations, the Pakistan Maritime Security Agency ship PMSS Kashmir was deployed to rescue the crew of the distressed Indian offshore tug and supply vessel MV Gautam in the Arabian Sea after the Maritime… pic.twitter.com/iAXMJ2rnsw
— brief. (@brief_pk) May 5, 2026
विशेषज्ञों का कहना है कि पाकिस्तान लंबे समय से सोशल मीडिया, अंतरराष्ट्रीय मंचों और प्रचार अभियानों के जरिए कश्मीर मुद्दे को वैश्विक स्तर पर जिंदा रखने की कोशिश करता रहा है। यही वजह है कि समुद्री बचाव जैसे मानवीय अभियानों में भी प्रतीकात्मक संदेश देने की रणनीति अपनाई जाती है।
हालांकि भारत की ओर से इस मामले पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है, लेकिन रणनीतिक हलकों में इसे पाकिस्तान की “नैरेटिव राजनीति” के हिस्से के तौर पर देखा जा रहा है।
