पाकिस्तान की इस नियुक्ति पर इसलिए चर्चा हो रही है, क्योंकि उसकी अर्थव्यवस्था लंबे समय से बाहरी वित्तीय मदद पर निर्भर है। हालांकि, इस मंच की अगुवाई करने से पाकिस्तान का अपना कर्ज कम नहीं होगा। न ही उसे कर्ज चुकाने की शर्तों में किसी तरह की विशेष राहत मिलेगी। इस मंच का उद्देश्य विकासशील देशों को कर्ज प्रबंधन के अनुभव साझा करने, आर्थिक सुधारों पर चर्चा करने और विकास के लिए वित्त जुटाने के बेहतर विकल्प तलाशने का अवसर देना है।
IMF से फिर मदद की उम्मीद, पहले भी मिल चुके हैं राहत पैकेज
पाकिस्तान की आर्थिक स्थिति का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि वह लगातार अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) से वित्तीय सहायता मांगता रहा है। 7 अक्टूबर को पाकिस्तान और IMF के बीच एक समझौते पर सहमति बनी थी। इसके तहत पाकिस्तान को करीब 1.21 अरब डॉलर की मदद मिल सकती है। हालांकि, इस सहायता के लिए IMF के कार्यकारी बोर्ड की मंजूरी जरूरी है।
इससे पहले 2023 में पाकिस्तान को 3 अरब डॉलर का IMF राहत पैकेज मिला था, जिसने उसे संप्रभु डिफॉल्ट यानी कर्ज चुकाने में पूरी तरह नाकाम होने की स्थिति से बचने में मदद की। इसके बाद 2024 में देश के लिए 7 अरब डॉलर का एक और कार्यक्रम मंजूर किया गया। जलवायु से जुड़ी चुनौतियों से निपटने के लिए पाकिस्तान ने IMF से 1.3 अरब डॉलर का अलग ऋण भी हासिल किया।
स्टेट बैंक ऑफ पाकिस्तान के आंकड़ों के मुताबिक, मार्च 2026 के अंत तक देश का कुल बाहरी कर्ज और देनदारियां 137.55 अरब डॉलर थीं। ऐसे में कर्ज प्रबंधन से जुड़े मंच की अध्यक्षता मिलना पाकिस्तान के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक अहम जिम्मेदारी है, लेकिन इससे उसकी आर्थिक चुनौतियां अपने आप दूर नहीं होंगी।
क्या है बॉरोअर्स प्लेटफॉर्म?
बॉरोअर्स प्लेटफॉर्म विकासशील देशों के लिए बनाया गया ऐसा मंच है, जहां कर्ज लेने वाले देश अपनी समस्याओं, अनुभवों और आर्थिक सुधारों से जुड़े उपायों पर चर्चा कर सकते हैं। इसका उद्देश्य कर्ज के बेहतर प्रबंधन, विकास के लिए वित्त जुटाने और अंतरराष्ट्रीय वित्तीय व्यवस्था में कर्जदार देशों की चिंताओं को मजबूती से सामने लाने के लिए स्थायी व्यवस्था तैयार करना है।
इस मंच को संयुक्त राष्ट्र की संस्था UNCTAD यानी व्यापार और विकास पर संयुक्त राष्ट्र सम्मेलन का सचिवालय सहयोग देता है। इसका विचार जुलाई 2025 में स्पेन के सेविले में आयोजित विकास वित्त सम्मेलन के दौरान सामने आया था। इसके बाद 15 अप्रैल 2026 को वॉशिंगटन में इसे औपचारिक रूप से शुरू किया गया।
अब तक कर्ज देने वाले देशों के बीच समन्वय के लिए कई व्यवस्थाएं मौजूद रही हैं, लेकिन कर्ज लेने वाले देशों के पास आपसी सहयोग के लिए ऐसा स्थायी मंच नहीं था। बॉरोअर्स प्लेटफॉर्म इसी कमी को दूर करने की कोशिश है।
UNCTAD में कर्ज और विकास से जुड़े मामलों की प्रमुख पेनेलोप हॉकिन्स ने अप्रैल में मंच की शुरुआत के दौरान कहा था कि कर्ज देने वाले देशों के समूह ‘पेरिस क्लब’ को इस तरह के समन्वय का करीब 70 साल का अनुभव है।
पाकिस्तान पहले से रहा है मंच की तैयारी में शामिल
पाकिस्तान इस मंच को तैयार करने की प्रक्रिया में पहले से भागीदारी कर रहा था। वह मिस्र की अगुवाई वाले कार्य समूह का उपाध्यक्ष था। इस समूह में कोलंबिया, होंडुरास, मालदीव, नेपाल और जाम्बिया भी शामिल थे। समूह ने मंच के कामकाज, सदस्यता और संचालन से जुड़े नियम तैयार करने में योगदान दिया।
UNCTAD के अनुसार, मंच के सदस्य हर साल अपना अध्यक्ष चुनते हैं। इसकी गवर्निंग काउंसिल में वित्त मंत्री, केंद्रीय बैंक के गवर्नर और अन्य वरिष्ठ अधिकारी शामिल होते हैं, जो मंच की प्राथमिकताएं तय करते हैं। वहीं, संचालन समिति तकनीकी और व्यावहारिक कामकाज संभालती है।
कर्ज प्रबंधन और आर्थिक सुधारों पर रहेगा जोर
पाकिस्तान के वित्त मंत्री मुहम्मद औरंगजेब ने कहा है कि उनका देश कर्ज प्रबंधन को बेहतर बनाने, आर्थिक सुधारों के अनुभव साझा करने और विकास के लिए वित्त जुटाने के नए तरीके तलाशने पर ध्यान देगा। उन्होंने योजनाओं को प्रभावी ढंग से लागू करने और उनके नतीजों का आकलन करने की जरूरत पर भी जोर दिया है।
हालांकि, अध्यक्ष के रूप में पाकिस्तान को दूसरे देशों के कर्ज की शर्तों पर बातचीत करने या अपने लिए भुगतान में राहत हासिल करने का अधिकार नहीं मिलेगा। UNCTAD के मुताबिक, यह मंच अपने सदस्यों की ओर से कर्ज की शर्तों या भुगतान को लेकर बातचीत नहीं करेगा। इसके बजाय यह कर्ज से जुड़ी मौजूदा व्यवस्थाओं के साथ मिलकर काम करेगा।
कुल मिलाकर, पाकिस्तान की भूमिका कर्ज से परेशान विकासशील देशों को एक साझा मंच उपलब्ध कराने, उनके अनुभवों का आदान-प्रदान बढ़ाने और उनकी समस्याओं को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उठाने की होगी। मंच की अध्यक्षता से उसे कूटनीतिक भूमिका निभाने का अवसर जरूर मिलेगा, लेकिन अपने विदेशी कर्ज और उसे चुकाने की जिम्मेदारी से उसे कोई छूट नहीं मिलेगी।
