सरकार की ओर से आयोजित इस कार्यक्रम का उद्देश्य विजयादशमी पर शस्त्र-पूजन की परंपरा को आगे बढ़ाना और सुरक्षा, साहस तथा राष्ट्र के प्रति सम्मान के भाव को रेखांकित करना है। मुख्यमंत्री मोहन यादव ने इस परंपरा को देश की सैन्य शक्ति, सुरक्षा और स्वतंत्रता के प्रति सम्मान का प्रतीक बताया है। उनका कहना है कि शस्त्र-पूजन को साहस, आत्मरक्षा और अन्याय के खिलाफ खड़े होने की भावना से जोड़कर देखा जाना चाहिए।
इन जिलों में प्रमुख नेता करेंगे शस्त्र-पूजन
राज्य सरकार ने कई जिलों में मंत्रियों और प्रमुख जनप्रतिनिधियों को कार्यक्रम की जिम्मेदारी सौंपी है। इंदौर में मुख्यमंत्री मोहन यादव शस्त्र-पूजन करेंगे। ग्वालियर में विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर कार्यक्रम की अगुवाई करेंगे। मंदसौर में उपमुख्यमंत्री जगदीश देवड़ा और रीवा में उपमुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ल शस्त्र-पूजन में शामिल होंगे।
राजधानी भोपाल में मंत्री विश्वास सारंग पूजा-अर्चना करेंगे। धार में मंत्री कैलाश विजयवर्गीय कार्यक्रम में मौजूद रहेंगे। नरसिंहपुर में मंत्री प्रहलाद सिंह पटेल और जबलपुर में मंत्री राकेश सिंह शस्त्र-पूजन करेंगे। सीहोर में मंत्री करण सिंह वर्मा तथा नर्मदापुरम में मंत्री उदय प्रताप सिंह कार्यक्रम की जिम्मेदारी संभालेंगे।इनके अलावा प्रदेश के अन्य जिलों में भी मंत्रियों और जनप्रतिनिधियों को जिम्मेदारियां दी गई हैं। सरकार की योजना के अनुसार, कुल 31 जिलों में मंत्री स्तर पर कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।
24 जिलों में प्रशासन संभालेगा जिम्मेदारी
प्रदेश के बाकी 24 जिलों में शस्त्र-पूजन कार्यक्रम के संचालन की जिम्मेदारी जिला प्रशासन को दी गई है। इन स्थानों पर कलेक्टर और पुलिस अधीक्षक मिलकर आयोजन की व्यवस्था सुनिश्चित करेंगे। इस तरह सरकार ने प्रदेश के सभी जिलों में कार्यक्रम आयोजित करने की योजना बनाई है।प्रशासनिक अधिकारियों की भागीदारी के जरिए यह सुनिश्चित किया जाएगा कि निर्धारित कार्यक्रम संबंधित जिलों में आयोजित हो सके। शस्त्र-पूजन में सुरक्षा से जुड़े विभागों की भूमिका भी महत्वपूर्ण रहेगी।
विजयादशमी पर शस्त्र-पूजन का धार्मिक महत्व
सनातन परंपरा में शस्त्रों को शक्ति, साहस और आत्मरक्षा का प्रतीक माना जाता है। विजयादशमी पर शस्त्र-पूजन की परंपरा का उद्देश्य शक्ति के सदुपयोग और अन्याय के विरुद्ध खड़े होने की भावना को मजबूत करना है। इस अवसर पर सैनिक और पुलिसकर्मी अपने हथियारों की पूजा करते हैं, जबकि कई अन्य क्षेत्रों में लोग अपने कामकाज से जुड़े औजारों का पूजन करते हैं।

शस्त्र-पूजन की एक मान्यता महाभारत काल से जुड़ी है। धार्मिक कथाओं के अनुसार, पांडवों ने अज्ञातवास के दौरान अपने हथियार शमी के पेड़ के नीचे छिपाए थे। अज्ञातवास पूरा होने के बाद अर्जुन ने शमी के पेड़ से अपने शस्त्र निकाले और राजा विराट के राज्य की रक्षा के लिए कौरवों की सेना का सामना किया। इसी मान्यता के कारण कई स्थानों पर विजयादशमी के दिन शमी के पेड़ और शस्त्रों की पूजा की जाती है।
राम और दुर्गा की विजय से जुड़ा पर्व
विजयादशमी को भगवान श्रीराम की रावण पर विजय और मां दुर्गा द्वारा महिषासुर के वध की मान्यताओं से भी जोड़ा जाता है। दोनों प्रसंग बुराई, अन्याय और अधर्म पर अच्छाई की जीत का संदेश देते हैं। इसी भावना के साथ शस्त्र-पूजन में शक्ति का इस्तेमाल सही उद्देश्यों, सुरक्षा और धर्म की रक्षा के लिए करने का संकल्प लिया जाता है।
मध्यप्रदेश में होने वाला यह आयोजन धार्मिक परंपरा के साथ-साथ सुरक्षा और जिम्मेदारी के महत्व को भी सामने रखेगा। प्रदेश के सभी 55 जिलों में तय व्यवस्था के अनुसार कार्यक्रम संपन्न कराने की जिम्मेदारी मंत्रियों और प्रशासनिक अधिकारियों को सौंपी गई है।
