ट्रंप ने फ्रांस में हो रही घटनाओं को लेकर कहा कि देश में बाहर से आने वाले ऐसे लोगों की वजह से हालात बिगड़ रहे हैं, जिनके दिलों में नफरत है। उन्होंने फ्रांस को एक महान देश बताते हुए कहा कि इस तरह की परिस्थितियां देश को कमजोर कर सकती हैं। ट्रंप ने मैक्रों से आग्रह किया कि बहुत देर होने से पहले सीमाओं को बंद कर नियंत्रण स्थापित किया जाए। उनके बयान के बाद फ्रांस में विरोध प्रदर्शनों और आव्रजन नीतियों को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चा तेज हो गई है।
इससे पहले ट्रंप ने फ्रांस की क्रांति से जुड़े ऐतिहासिक संदर्भ का उल्लेख करते हुए मजाकिया अंदाज में कहा था कि फ्रांस क्रांति के लिए प्रसिद्ध है और लोग वहां जाकर क्रांति में शामिल हो सकते हैं। हालांकि, हिंसक घटनाओं के बाद उनका रुख अधिक सख्त नजर आया। उन्होंने मौजूदा स्थिति को फ्रांस के लिए गंभीर बताते हुए सीमाओं पर नियंत्रण को जरूरी बताया।
अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने भी फ्रांस में हुई हिंसा पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि पश्चिमी देशों की उदारवादी सरकारों ने दया और विविधता के नाम पर तीसरी दुनिया के लोगों को फ्रांस सहित दूसरे देशों में आने दिया, लेकिन उनके समाज में घुलने-मिलने और अनुकूलता से जुड़े बुनियादी सवालों को नजरअंदाज किया गया। वेंस के अनुसार, सरकारों को पहले ही संभावित समस्याओं को लेकर चेतावनी दी गई थी, लेकिन समय रहते आवश्यक कदम नहीं उठाए गए।
लिमोजेस शहर के ऐतिहासिक सिटी हॉल में आग लगने की घटना का उल्लेख करते हुए वेंस ने चिंता जताई। यह इमारत करीब 143 साल पुरानी है और आग के कारण इसका कुछ हिस्सा क्षतिग्रस्त हो गया। वेंस ने उम्मीद जताई कि फ्रांस इस स्थिति पर काबू पाएगा और अपनी ऐतिहासिक इमारतों को आगे होने वाले नुकसान से बचा सकेगा। उन्होंने अमेरिकी नागरिकों से भी फ्रांस में हो रही घटनाओं पर ध्यान देने की अपील की।
फ्रांस में विरोध प्रदर्शनों का मुख्य कारण महंगाई, शिक्षा व्यवस्था की समस्याएं और सरकारी सेवाओं की खराब स्थिति बताई गई है। इन मुद्दों को लेकर छात्र, ट्रेड यूनियन और अन्य समूह सड़कों पर उतरे थे। फ्रांस के गृह मंत्रालय के अनुसार, 17 अक्टूबर को हुए प्रदर्शनों में करीब 5 लाख 50 हजार लोग शामिल हुए। वहीं, आयोजकों ने प्रदर्शनकारियों की संख्या लगभग 8 लाख बताई। इस तरह प्रदर्शनों में शामिल लोगों की संख्या को लेकर सरकारी आंकड़ों और आयोजकों के दावों में अंतर सामने आया।
प्रदर्शन शुरुआत में आर्थिक परेशानियों और सार्वजनिक सुविधाओं से जुड़ी शिकायतों को लेकर किए गए थे, लेकिन बाद में कई जगहों पर स्थिति हिंसक हो गई। कुछ समूहों की पुलिस के साथ झड़प हुई, दुकानों में लूटपाट की गई और कई शहरों में इमारतों को आग के हवाले कर दिया गया। अधिकारियों के मुताबिक, घटनाओं के बाद करीब 1800 लोगों को गिरफ्तार किया गया। हिंसा के दौरान सैकड़ों पुलिसकर्मी और आपातकालीन सेवाओं से जुड़े कर्मचारी भी घायल हुए।
लिमोजेस में ऐतिहासिक सिटी हॉल को नुकसान पहुंचने की घटना ने स्थिति की गंभीरता को और स्पष्ट किया है। विरोध प्रदर्शनों के पीछे आर्थिक और सार्वजनिक सेवाओं से जुड़ी शिकायतें हैं, जबकि अमेरिकी नेतृत्व ने आव्रजन और विविधता की नीतियों को लेकर अलग दृष्टिकोण सामने रखा है। फिलहाल फ्रांस में हालात तनावपूर्ण बने हुए हैं और हिंसक घटनाओं के बाद स्थिति को नियंत्रित करना प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती है।
