आरिफ अजाकिया ने अपने व्यक्तिगत अनुभवों और अपनी पुरानी राजनीतिक पृष्ठभूमि का हवाला देते हुए कहा कि जिस दौर की घटनाओं और मिशन को फिल्म ‘धुरंधर’ में फिल्माया गया है, उस समय वह स्वयं कराची के उस विशेष प्रशासनिक क्षेत्र के मेयर के रूप में अपनी सेवाएं दे रहे थे। उन्होंने भावुक होते हुए कहा कि उनका जन्म और पालन-पोषण कराची के उसी विवादित ल्यारी इलाके में हुआ है, जहां बलूच गैंग और विभिन्न आतंकी संगठनों का एक समय पर भारी वर्चस्व हुआ करता था।
पूर्व मेयर के अनुसार, वह उस दौर के सुरक्षा हालातों और पर्दे के पीछे चलने वाली गतिविधियों के प्रत्यक्षदर्शी रहे हैं, इसलिए वह पूरी जिम्मेदारी के साथ यह स्वीकार करते हैं कि फिल्म के भीतर जो कुछ भी दिखाया गया है, उसमें रत्ती भर भी झूठ नहीं है। इसके साथ ही उन्होंने मंच से अपनी जड़ों के बारे में बात करते हुए यह भी स्वीकार किया कि भले ही उनका जन्म कराची में हुआ हो, लेकिन उनके माता-पिता अविभाजित भारत के जूनागढ़, गुजरात से ताल्लुक रखते थे, इसलिए वह स्वयं को पाकिस्तानी मानने की बजाय भारतीय मूल का नागरिक कहलाना अधिक पसंद करते हैं।
मध्य प्रदेश सहित देशभर के सिनेमाघरों में धूम मचाने वाली इस फिल्म की कहानी की बात करें तो ‘धुरंधर’ और इसका हालिया सीक्वल दर्शकों को एक बेहद संजीदा और खतरनाक खुफिया मिशन पर ले जाता है। फिल्म की पटकथा में दिखाया गया है कि किस प्रकार भारतीय खुफिया एजेंसी का एक जांबाज अधिकारी जसकीरत, विषम परिस्थितियों के बीच अपना नाम और पहचान बदलकर हमजा बन जाता है और पाकिस्तान के सबसे संवेदनशील इलाके ल्यारी के एक खतरनाक बलूच गैंग में सफलतापूर्वक घुसपैठ करता है।
वहां रहते हुए वह न केवल स्थानीय अपराधियों के तंत्र को ध्वस्त करता है बल्कि एक बड़े अंतरराष्ट्रीय आतंकी संगठन के मंसूबों को भी नेस्तनाबूद कर देता है। रणवीर सिंह के दमदार अभिनय से सजी इस फिल्म में सारा अर्जुन, अर्जुन रामपाल और आर. माधवन जैसे स्थापित कलाकारों ने भी महत्वपूर्ण भूमिकाएं निभाई हैं। जहाँ एक तरफ इस फिल्म की आलोचना करने वाले इसे केवल एक काल्पनिक और अतिशयोक्तिपूर्ण कहानी बता रहे थे, वहीं अब खुद कराची की कमान संभाल चुके एक पूर्व प्रशासनिक अधिकारी द्वारा इसे सच का आईना बताए जाने के बाद इस फिल्म की प्रामाणिकता पर उठ रहे तमाम सवालों पर पूरी तरह से विराम लग गया है।
