बतौर मुख्य अभिनेता ऋषि कपूर ने 1973 में फिल्म बॉबी से शुरुआत की। इस फिल्म में उन्होंने राजनाथ का किरदार निभाया था और डिंपल कपाड़िया उनके साथ मुख्य भूमिका में थीं। फिल्म की सफलता ने ऋषि कपूर को युवा दर्शकों के बीच लोकप्रिय बना दिया। उनकी मासूम प्रेमी वाली छवि लंबे समय तक हिंदी सिनेमा में उनकी पहचान बनी रही।
इसके बाद 1976 में आई लैला मजनू में उन्होंने मजनू की भूमिका निभाकर रोमांटिक अभिनय का एक और प्रभावशाली उदाहरण पेश किया। प्रेम और विरह से जुड़े इस किरदार में उनकी भावनात्मक प्रस्तुति दर्शकों को पसंद आई और उनके करियर को मजबूती मिली।
1977 की अमर अकबर एंथनी में ऋषि कपूर ने अकबर इलाहाबादी का किरदार निभाया। अमिताभ बच्चन और विनोद खन्ना के साथ वाली इस फिल्म में उनका अंदाज अलग था। नीतू सिंह के साथ उनकी जोड़ी को भी दर्शकों ने खूब पसंद किया।
1982 में आई प्रेम रोग ऋषि कपूर के करियर की महत्वपूर्ण फिल्मों में शामिल रही। फिल्म में उन्होंने देवधर की भूमिका निभाई। सामाजिक विषय से जुड़ी इस कहानी में उनके अभिनय ने यह दिखाया कि वह केवल रोमांटिक भूमिकाओं तक सीमित अभिनेता नहीं थे।
समय के साथ ऋषि कपूर ने अपनी छवि बदलने की कोशिश की। 2009 की लव आज कल में उन्होंने वीर सिंह का किरदार निभाया। फिल्म में उनका सरदार वाला रूप और उम्रदराज प्रेम कहानी का हिस्सा दर्शकों के सामने उनके अभिनय का अलग पक्ष लेकर आया।
2012 की अग्निपथ में ऋषि कपूर ने राउफ लाला का नकारात्मक किरदार निभाया। यह उनके करियर के सबसे चर्चित बदलावों में से एक था। पर्दे पर पहली बार खलनायक की भूमिका में उनका अंदाज काफी प्रभावशाली रहा और उन्होंने साबित किया कि उम्र के साथ अभिनेता अपनी स्क्रीन पहचान को पूरी तरह बदल सकता है।
2013 में डी-डे में उन्होंने इकबाल नामक माफिया डॉन का किरदार निभाया। इस भूमिका में उनका गंभीर और कठोर रूप देखने को मिला। इसके बाद 2016 की कपूर एंड संस में उन्होंने 90 वर्षीय दादा अमरजीत की भूमिका निभाई और अपने मेकअप तथा अभिनय से दर्शकों को प्रभावित किया।
2018 में 102 नॉट आउट में उन्होंने 75 वर्षीय बेटे बाबूलाल की भूमिका निभाई, जबकि अमिताभ बच्चन उनके 102 वर्षीय पिता बने। इसी वर्ष मुल्क में मुराद अली मोहम्मद के रूप में ऋषि कपूर ने एक संवेदनशील और गंभीर किरदार निभाया।
ऋषि कपूर का निधन 30 अप्रैल 2020 को हुआ, लेकिन उनके अभिनय की विविधता आज भी उन्हें हिंदी सिनेमा के यादगार कलाकारों में बनाए हुए है। उनकी जयंती पर उनके किरदार यह याद दिलाते हैं कि उन्होंने अपने करियर में लगातार अलग-अलग भूमिकाओं को अपनाकर अभिनय की व्यापक क्षमता दिखाई।
