दिग्विजय सिंह ने यह यात्रा मंदिरों में चढ़ावे और धार्मिक स्थलों की व्यवस्था में पारदर्शिता की मांग को लेकर शुरू की है। उनका कहना है कि यात्रा के दौरान भोजन नाश्ते चाय और ठहरने की व्यवस्था में अलग-अलग स्थानों पर लोग स्वेच्छा से सहयोग कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि उन्हें यह जानकारी नहीं है कि कौन व्यक्ति किस स्थान पर भंडारा करा रहा है। दिग्विजय सिंह ने अपनी नर्मदा परिक्रमा का उदाहरण देते हुए बताया कि उस दौरान भी कई लोग अपने भंडारे की व्यवस्था यात्रा में शामिल कराने के लिए आग्रह करते थे। उनके अनुसार इस बार भी लोग खुद आगे आकर यात्रियों के भोजन और अन्य जरूरतों का इंतजाम कर रहे हैं।
यात्रा की व्यवस्थाओं पर प्रतिदिन करीब 30 से 50 हजार रुपये खर्च होने का अनुमान है। कांग्रेस विधायक महेश परमार के मुताबिक छोटे ग्रामीण पड़ावों पर खर्च लगभग 20 से 30 हजार रुपये तक रह सकता है जबकि बड़े पड़ावों पर यह राशि 50 से 60 हजार रुपये तक पहुंच सकती है। करीब 70 दिन की यात्रा के लिए कुल 30 से 40 लाख रुपये खर्च होने का अनुमान बताया गया है। शुरुआती पड़ावों पर यात्रियों के रुकने भोजन चाय और नाश्ते की व्यवस्था स्थानीय लोगों के सहयोग से की गई है। आयोजकों के मुताबिक रास्ते में लगभग हर तीन किलोमीटर पर चाय और सुबह के नाश्ते के साथ दोनों समय भोजन की व्यवस्था करने के लिए लोग आगे आए हैं।
यात्रा के दौरान प्रतिदिन लगभग 15 किलोमीटर पैदल चलने की योजना है। इसकी तैयारी के लिए दिग्विजय सिंह रोज करीब आठ किलोमीटर पैदल चलने का अभ्यास कर रहे थे। उज्जैन से निकलने के बाद यात्रा तराना और कनासिया होते हुए शाजापुर जिले की ओर बढ़ेगी। इसके बाद यह सारंगपुर खुजनेर राजगढ़ चाचौड़ा आरोन अशोकनगर और चंदेरी सहित कई क्षेत्रों से गुजरेगी। मध्य प्रदेश के बाद यात्रा उत्तर प्रदेश में प्रवेश करेगी और तालबेहट जेरोन ओरछा चिरगांव उरई कालपी कानपुर देहात लखनऊ देहात और बाराबंकी के रास्ते अयोध्या पहुंचेगी। यात्रा का अंतिम पड़ाव राम मंदिर निर्धारित किया गया है।
इस पदयात्रा के साथ एक विशेष रथ भी चल रहा है। इसमें भगवान राम लक्ष्मण माता सीता और हनुमान की प्रतिमाएं स्थापित की गई हैं। रथ में गंगा यमुना शिप्रा कावेरी और नर्मदा नदियों के जल से भरे कलश भी रखे गए हैं। आयोजकों के अनुसार कई संतों ने यात्रा को समर्थन और आशीर्वाद दिया है। महामंडलेश्वर कंप्यूटर बाबा सहित अन्य धार्मिक हस्तियों के इसमें शामिल होने की बात कही गई है। ज्योतिष्पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती और द्वारका शारदा पीठ के शंकराचार्य स्वामी सदानंद सरस्वती का भी समर्थन मिलने की जानकारी आयोजकों ने दी है।
यात्रा में शामिल होने पहुंचीं फराह खान ने कहा कि वह अपनी इच्छा से इस पदयात्रा में शामिल हुई हैं। उन्होंने मंदिरों से सोने की चोरी और धार्मिक स्थलों की व्यवस्था में पारदर्शिता जैसे मुद्दों को महत्वपूर्ण बताया। फराह खान के मुताबिक वह शुरुआती पांच से छह दिन यात्रा में रहेंगी और पारिवारिक कार्यक्रम के बाद दोबारा इसमें शामिल होंगी। आयोजकों का कहना है कि रास्ते में अलग-अलग स्थानों पर लोग यात्रा से जुड़ेंगे। अब सभी की नजर इस बात पर रहेगी कि करीब 950 किलोमीटर लंबी यह पदयात्रा निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार कब अयोध्या पहुंचती है और मंदिरों की व्यवस्था में पारदर्शिता का मुद्दा किस तरह आगे बढ़ता है।
