पथ संचलन की शुरुआत से पहले संबंधित बस्तियों में विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए गए। इनमें संघ के गीत अमृत वचन बौद्धिक और प्रार्थना शामिल रहे। इन कार्यक्रमों के बाद स्वयंसेवक निर्धारित मार्गों पर संचलन के लिए निकले। सभी स्वयंसेवक एक साथ कदमताल करते हुए आगे बढ़े। उनके साथ बैंड भी शामिल रहा और कई स्वयंसेवक हाथों में लाठी लेकर चलते दिखाई दिए। संचलन के दौरान स्वयंसेवकों ने अनुशासन बनाए रखा और निर्धारित मार्ग से होते हुए कार्यक्रम पूरा किया। इसके बाद सभी अपने अपने क्षेत्रों की बस्तियों में लौट गए।
उज्जैन में दशहरे के अवसर पर संघ की ओर से अलग-अलग बस्तियों में पथ संचलन निकालने की परंपरा रही है। इस आयोजन के माध्यम से स्वयंसेवक एकजुट होकर निर्धारित कार्यक्रम में भाग लेते हैं। इस बार भी शहर की 65 बस्तियों में विजयादशमी के दिन संचलन आयोजित किए गए। मार्गों पर स्थानीय लोगों की मौजूदगी और स्वागत की तैयारियों ने आयोजन को खास बनाया। कई स्थानों पर रंगोली के जरिए रास्तों को सजाया गया। लोगों ने फूल बरसाकर स्वयंसेवकों का स्वागत किया और उनके गुजरने के दौरान अभिवादन किया।
संघ की ओर से पथ संचलन के आयोजन केवल विजयादशमी तक सीमित नहीं रहेंगे। जानकारी के अनुसार 20 अक्टूबर से 25 अक्टूबर तक शहर की अलग-अलग बस्तियों में कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। इन कार्यक्रमों के तहत संबंधित क्षेत्रों में स्वयंसेवक एकत्र होंगे और तय कार्यक्रम के अनुसार संचलन निकालेंगे। आयोजन की व्यवस्था स्थानीय स्तर पर की जा रही है। इससे शहर की विभिन्न बस्तियों में अलग-अलग दिनों पर संघ के कार्यक्रम देखने को मिलेंगे।
विजयादशमी पर निकले पथ संचलन के दौरान पारंपरिक वेशभूषा बैंड की धुन और एक साथ कदमताल करते स्वयंसेवक आकर्षण का केंद्र रहे। स्वागत के लिए बनाई गई रंगोलियों और फूलों की वर्षा से कई मार्गों पर उत्सवी माहौल दिखाई दिया। अब 25 अक्टूबर तक उज्जैन की अन्य बस्तियों में भी पथ संचलन और संबंधित कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। इन आयोजनों के जरिए संघ की स्थानीय इकाइयां अपने तय कार्यक्रमों को आगे बढ़ाएंगी।
