बोर्ड ऑफिस चौराहे पर किया प्रदर्शन
मंगलवार को बड़ी संख्या में बैंक अधिकारी और कर्मचारी एमपी नगर स्थित बोर्ड ऑफिस चौराहे पर एकत्रित हुए। यहां उन्होंने हाथों में तख्तियां लेकर निजीकरण के खिलाफ नारेबाजी की। इसके बाद कर्मचारियों ने रैली निकाली और सभा आयोजित कर अपनी मांगों को दोहराया। प्रदर्शन को यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियंस का भी समर्थन मिला। कर्मचारियों का कहना है कि बैंक का निजीकरण केवल उनके रोजगार और भविष्य से जुड़ा मुद्दा नहीं है बल्कि इसका असर आम ग्राहकों और सार्वजनिक बैंकिंग व्यवस्था पर भी पड़ सकता है।
यूनियन पदाधिकारियों ने सरकार के फैसले पर उठाए सवाल
सभा को यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियंस और आईडीबीआई बैंक की विभिन्न ट्रेड यूनियनों के पदाधिकारियों ने संबोधित किया। इनमें वीके शर्मा दीपक रत्न शर्मा विकास सिंह नागेश पांचाल आकांक्षा गुप्ता गुणशेखरण भगवान स्वरूप कुशवाहा एमएस जयशंकर जेपी दुबे सत्येंद्र चौरसिया श्रीपाद घोटनकर एसके गुप्ता और अनंत खरे सहित कई वक्ता शामिल रहे। सभी ने बैंक के निजीकरण के प्रस्ताव का विरोध करते हुए कर्मचारियों की एकजुटता पर जोर दिया।
यूनाइटेड फोरम ऑफ आईडीबीआई ऑफिसर्स एंड एम्प्लाइज के प्रवक्ता अनिल परमार ने बताया कि बैंककर्मी दो दिनों की हड़ताल पर हैं। इस दौरान काम बंद रखने के साथ रैली और सभा के माध्यम से विरोध दर्ज कराया जा रहा है। उनका कहना है कि कर्मचारियों की मांगों पर सरकार को गंभीरता से विचार करना चाहिए।
सार्वजनिक निवेश की सुरक्षा का मुद्दा उठाया
यूनियन पदाधिकारी शर्मा ने सभा में कहा कि आईडीबीआई बैंक को संकट से उबारने में सार्वजनिक धन और भारतीय जीवन बीमा निगम यानी एलआईसी के निवेश की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। ऐसे बैंक का निजीकरण जनहित के विरुद्ध है। उन्होंने कहा कि बैंक की परिसंपत्तियों और सार्वजनिक निवेश की रक्षा करना जरूरी है। संगठन का मानना है कि सार्वजनिक क्षेत्र में बैंक की मौजूदगी से आम लोगों को बैंकिंग सेवाएं उपलब्ध कराने में मदद मिलती है।
यूनियन ने केंद्र सरकार से निजीकरण की प्रक्रिया तत्काल रद्द करने और आईडीबीआई बैंक को सार्वजनिक क्षेत्र में बनाए रखने की मांग की है। प्रदर्शनकारियों ने कहा कि बैंक के भविष्य से जुड़े फैसले लेते समय कर्मचारियों और आम ग्राहकों के हितों को भी ध्यान में रखा जाना चाहिए।
मांगें नहीं मानीं तो आंदोलन होगा तेज
बैंक यूनियनों ने साफ किया है कि यदि सरकार उनकी मांगों पर सकारात्मक पहल नहीं करती है तो आंदोलन को और व्यापक किया जाएगा। कर्मचारियों का कहना है कि वे अपनी मांगों को लेकर एकजुट हैं और जरूरत पड़ने पर आगे भी विरोध प्रदर्शन जारी रखेंगे। फिलहाल दो दिवसीय हड़ताल के चलते बैंकिंग सेवाओं पर असर पड़ा है। ग्राहकों को भी अपने जरूरी बैंकिंग काम के लिए परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।
