मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार फिलहाल इंदौर और आसपास के क्षेत्रों में प्री-मानसून सिस्टम सक्रिय है। टर्फ लाइन और पश्चिमी विक्षोभ के प्रभाव से अगले तीन से चार दिनों तक तेज हवाओं, गरज-चमक और बारिश का दौर जारी रह सकता है। इससे तापमान में और गिरावट आने की संभावना है।
सोमवार शाम आई तेज आंधी का असर शहर की बिजली व्यवस्था पर भी देखने को मिला। सुरक्षा के मद्देनजर बिजली कंपनी ने 450 फीडर से जुड़ी 132 केवी लाइन को अस्थायी रूप से बंद कर दिया था। तेज हवाओं के कारण कई स्थानों पर पेड़ और टहनियां गिर गईं, जिससे बिजली के तार क्षतिग्रस्त हो गए। इसके चलते शहर के कई इलाकों में देर रात तक बिजली आपूर्ति बाधित रही। नगर निगम और बिजली कंपनी की टीमों ने संयुक्त रूप से मरम्मत कार्य कर स्थिति को सामान्य बनाया।
मौसम विभाग का कहना है कि इस बार मध्यप्रदेश में मानसून की दस्तक सामान्य से कुछ देर से हो सकती है। आमतौर पर प्रदेश में मानसून 15 जून के आसपास प्रवेश करता है, लेकिन इस वर्ष इसकी गति धीमी बनी हुई है। विशेषज्ञों के अनुसार मानसून अभी तक केरल नहीं पहुंचा है और सामान्य तौर पर केरल पहुंचने के करीब 15 दिन बाद यह मध्यप्रदेश में प्रवेश करता है। ऐसे में मानसून के आगमन में कुछ दिनों की देरी संभव है।
हालांकि मानसून की देरी के बावजूद प्री-मानसून गतिविधियां लोगों को गर्मी से राहत दे रही हैं। पिछले कुछ वर्षों के आंकड़ों पर नजर डालें तो जून में इंदौर का तापमान अपेक्षाकृत नियंत्रित रहा है। वर्ष 2025 में जून का अधिकतम तापमान 41.6 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया था, जबकि पिछले साल जून में साढ़े पांच इंच से अधिक बारिश हुई थी।
इंदौर का मौसम रिकॉर्ड भी काफी रोचक रहा है। वर्ष 1980 में जून महीने में 17 इंच से अधिक बारिश दर्ज की गई थी, जबकि 23 जून 2003 को 24 घंटे में लगभग 5 इंच बारिश का रिकॉर्ड बना था। दूसरी ओर 3 जून 1991 को शहर का तापमान 45.8 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया था।
फिलहाल मौसम विभाग ने नागरिकों को तेज हवाओं और संभावित बारिश को देखते हुए सतर्क रहने की सलाह दी है। आने वाले दिनों में मौसम के और सुहाना बने रहने की संभावना है।
