10 साल से ज्यादा सेवा वालों को मिलेगा लाभ
कोर्ट ने स्पष्ट किया कि जो कर्मचारी 10 साल या उससे अधिक समय से लगातार सेवाएं दे रहे हैं, उन्हें स्थाई श्रेणी के लाभ से वंचित करने का कोई ठोस कारण नहीं है। ऐसे कर्मचारियों को वर्गीकरण (classification) और उससे जुड़े लाभ मिलना चाहिए।
न्यूनतम वेतन देना जरूरी
हाईकोर्ट ने कहा कि आउटसोर्स और संविदा कर्मचारियों को कम वेतन देना अनुचित है। वर्तमान में कई आउटसोर्स कर्मचारियों को सिर्फ 8 से 10 हजार रुपए तक वेतन मिल रहा है, जबकि उसी पद पर नियमित कर्मचारियों को इससे दोगुना या ज्यादा वेतन मिलता है। कोर्ट ने निर्देश दिए हैं कि सभी श्रेणियों के कर्मचारियों को न्यूनतम वेतन सुनिश्चित किया जाए।
कितने कर्मचारी होंगे प्रभावित
प्रदेश में करीब:
2.5 लाख संविदा कर्मचारी
1.5 लाख बिजली कंपनियों में आउटसोर्स कर्मचारी
1 लाख अन्य विभागों में आउटसोर्स कर्मचारी
12 हजार अंशकालिक कर्मचारी
यानी कुल मिलाकर 5 लाख से ज्यादा कर्मचारी इस फैसले से प्रभावित होंगे।
सरकार को भी दी नसीहत
कोर्ट ने यह भी माना कि सरकार हर साल इन कर्मचारियों की सेवाएं जारी रखती है, जिससे साफ है कि उनकी जरूरत बनी हुई है। ऐसे में उन्हें आर्थिक न्याय, सम्मानजनक जीवन और पर्याप्त वेतन देना जरूरी है।
नर्सिंग भर्ती पर भी अहम टिप्पणी
सुनवाई के दौरान नर्सिंग ऑफिसर भर्ती में 100% महिला आरक्षण पर भी सवाल उठे। कोर्ट ने अंतरिम आदेश देते हुए पुरुष अभ्यर्थियों को भी आवेदन करने की अनुमति दे दी है। हालांकि उनका अंतिम चयन कोर्ट के अंतिम फैसले पर निर्भर करेगा।
आगे क्या होगा?
अब राज्य सरकार को कोर्ट के निर्देशों के अनुसार नीति में बदलाव करना होगा। इससे कर्मचारियों की आर्थिक स्थिति मजबूत होने के साथ-साथ सरकारी व्यवस्था में भी स्थिरता आने की उम्मीद है।
