कलेक्टर ने बताया कि पिछले कुछ वर्षों में भूजल स्तर में लगातार गिरावट दर्ज की गई है जिसका सीधा असर शहरी और ग्रामीण दोनों क्षेत्रों में पानी की उपलब्धता पर पड़ा है। खासकर गर्मी के मौसम में हालात और भी खराब हो जाते हैं जब कई इलाकों में पानी की भारी कमी महसूस की जाती है। इसी स्थिति को ध्यान में रखते हुए अब प्रशासन 10 से 15 वर्षों की जरूरतों को ध्यान में रखकर ठोस और व्यापक प्रोजेक्ट तैयार करने की दिशा में काम करेगा।
उन्होंने कहा कि केवल टैंकर या अस्थायी जल आपूर्ति जैसे उपाय समस्या का स्थायी समाधान नहीं हैं। इसके बजाय जल संरक्षण भूजल पुनर्भरण और आधुनिक जल प्रबंधन तकनीकों को अपनाना बेहद जरूरी है। आने वाले समय में ऐसे प्रोजेक्ट्स पर फोकस किया जाएगा जो न केवल वर्तमान जरूरतों को पूरा करें बल्कि भविष्य की पीढ़ियों के लिए भी जल संसाधनों को सुरक्षित रखें।
कलेक्टर ने यह भी स्पष्ट किया कि योजनाओं के क्रियान्वयन में किसी भी प्रकार की लापरवाही या भ्रष्टाचार बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने सख्त लहजे में कहा कि यदि किसी स्तर पर गड़बड़ी या अनियमितता पाई जाती है तो संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। यह संकेत प्रशासनिक व्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
जल संकट से निपटने के लिए जनभागीदारी को भी अहम बताया गया है। कलेक्टर का कहना है कि केवल सरकारी प्रयासों से समस्या का समाधान संभव नहीं है बल्कि आम नागरिकों को भी जल संरक्षण के प्रति जागरूक होना होगा। वर्षा जल संचयन और पानी के विवेकपूर्ण उपयोग जैसे उपायों को अपनाकर इस संकट को काफी हद तक कम किया जा सकता है।
इस पहल के तहत जिले में विभिन्न स्तरों पर सर्वे और अध्ययन भी किए जाएंगे ताकि जल स्रोतों की वास्तविक स्थिति का आकलन किया जा सके। इसके आधार पर ही योजनाओं को अंतिम रूप दिया जाएगा जिससे संसाधनों का बेहतर उपयोग सुनिश्चित हो सके।
बैतूल में जल संकट को लेकर उठाया गया यह कदम प्रशासन की गंभीरता को दर्शाता है। यदि योजनाएं प्रभावी तरीके से लागू होती हैं तो आने वाले वर्षों में जिले को जल संकट से बड़ी राहत मिल सकती है। फिलहाल नागरिकों को उम्मीद है कि यह पहल केवल कागजों तक सीमित नहीं रहेगी बल्कि जमीनी स्तर पर भी सकारात्मक बदलाव लेकर आएगी।
