नई दिल्ली:देश की एक प्रमुख आईवियर रिटेल कंपनी की कर्मचारी ड्रेस पॉलिसी को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है, जिसमें धार्मिक प्रतीकों से जुड़े नियमों पर तीखी बहस शुरू हो गई है। मामला तब सामने आया जब कंपनी के कथित स्टाइल गाइड में कुछ ऐसे दिशा निर्देशों का उल्लेख सामने आया, जिनमें विभिन्न धार्मिक परंपराओं से जुड़े प्रतीकों और पहनावे को लेकर अलग अलग तरह के प्रावधान बताए गए हैं। इस नीति को लेकर सोशल मीडिया पर विरोध और समर्थन दोनों तरह की प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं।
विवाद के केंद्र में यह दावा है कि कंपनी की नीति में हिजाब पहनने की अनुमति दी गई है, हालांकि उसके लिए रंग और डिजाइन से जुड़ी कुछ शर्तें निर्धारित हैं। इसी तरह पगड़ी पहनने की अनुमति का भी उल्लेख है, लेकिन उसमें भी एक समान रंग को लेकर दिशा निर्देश दिए गए हैं। दूसरी ओर तिलक, बिंदी और कलावा जैसे धार्मिक प्रतीकों के उपयोग पर रोक जैसी बात सामने आने के बाद विवाद और अधिक गहरा गया है।
इस मुद्दे को लेकर फिल्म निर्माता और सामाजिक कार्यकर्ता अशोक पंडित ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने सोशल मीडिया पर इस नीति की आलोचना करते हुए इसे धार्मिक भावनाओं के प्रति असंतुलित बताया और लोगों से कंपनी के बहिष्कार की अपील की है। उनके अनुसार यह नीति एक तरफ कुछ धार्मिक पहचान को अनुमति देती है, जबकि दूसरी तरफ कुछ परंपरागत प्रतीकों को प्रतिबंधित करती है, जो समानता के सिद्धांत पर सवाल खड़े करता है।
उनकी टिप्पणी के बाद यह मामला तेजी से चर्चा में आ गया और सोशल मीडिया पर दो अलग अलग विचार सामने आने लगे। एक वर्ग का मानना है कि कॉरपोरेट संस्थानों में ड्रेस कोड का उद्देश्य पेशेवर माहौल बनाए रखना होता है, इसलिए कुछ समान नियम जरूरी होते हैं। वहीं दूसरा वर्ग इसे धार्मिक स्वतंत्रता और सांस्कृतिक पहचान से जुड़ा मुद्दा मान रहा है और इसे अनुचित प्रतिबंध के रूप में देख रहा है।
इस विवाद में यह भी चर्चा का विषय बन गया है कि कॉरपोरेट संस्थानों में व्यक्तिगत धार्मिक प्रतीकों और पेशेवर ड्रेस कोड के बीच संतुलन कैसे बनाया जाए। कई लोगों का मानना है कि कंपनियों को ऐसा नियम बनाना चाहिए जो सभी कर्मचारियों के लिए समान हो और किसी विशेष समुदाय को लेकर अलग अलग व्याख्या की स्थिति न बने।
