FIR के अनुसार, 28 सितंबर 2026 को बालचंदर मतदान केंद्र संख्या 210 के बूथ लेवल ऑफिसर के पास 30 प्री-प्रिंटेड Form 7 लेकर पहुंचे थे। Form 7 का इस्तेमाल मतदाता सूची में किसी व्यक्ति के नाम को हटाने या उसके नाम पर आपत्ति दर्ज कराने के लिए किया जाता है। आरोप है कि इन फॉर्म में उन मतदाताओं के नाम पहले से दर्ज थे, जिनसे बालचंदर का कोई संबंध नहीं था। BLO और BLO सुपरवाइजर ने कथित तौर पर फॉर्म का यह सामूहिक सेट स्वीकार करने से इनकार कर दिया। बार-बार अनुरोध के बावजूद फॉर्म स्वीकार नहीं किए गए, जिसके बाद बालचंदर उन्हें परिसर में छोड़कर चले गए।
इसके बाद चुनाव अधिकारियों ने संबंधित मतदाताओं की वास्तविक स्थिति की जांच की। 30 सितंबर को BLO और सुपरवाइजर ने फील्ड वेरिफिकेशन किया और 1 अक्टूबर को सहायक निर्वाचक पंजीकरण अधिकारी तथा निर्वाचक पंजीकरण अधिकारी ने भी सत्यापन में हिस्सा लिया। जांच में सभी 30 मतदाता अपने मतदाता रिकॉर्ड में दर्ज पते पर रहते हुए पाए गए। अधिकारियों के मुताबिक, इनमें से 14 मतदाता एक पते पर और बाकी 16 दूसरे पते पर दर्ज थे। इन 30 लोगों में एक कांग्रेस बूथ लेवल एजेंट भी शामिल बताया गया है। सत्यापन के आधार पर संबंधित Form 7 को स्वीकार करने योग्य नहीं माना गया और उन्हें खारिज किए जाने की बात कही गई।
पुलिस ने यह कार्रवाई मुशीराबाद विधानसभा क्षेत्र के निर्वाचक पंजीकरण अधिकारी टी. प्रवीण कुमार रेड्डी की शिकायत के आधार पर की है। बालचंदर के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की धारा 217 और 318(2) के साथ जन-प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 की धारा 31 के तहत मामला दर्ज किया गया है। धारा 217 गलत जानकारी देकर सरकारी अधिकारी की कानूनी शक्ति के इस्तेमाल को प्रभावित करने से संबंधित है, जबकि धारा 318(2) धोखाधड़ी से जुड़ी है। मामले में प्री-प्रिंटेड फॉर्म तैयार करने और जमा करने से जुड़े पहलुओं की भी जांच की जा रही है।
यह मामला तेलंगाना में मतदाता सूची के SIR के दौरान Form 7 के कथित दुरुपयोग को लेकर चल रहे विवाद के बीच सामने आया है। मुशीराबाद के अलावा हैदराबाद के बहादुरपुरा और गोशामहल विधानसभा क्षेत्रों से भी पहले से भरी हुई जानकारी वाले Form 7 सामने आने की बात सामने आई है। चुनाव अधिकारियों ने ऐसे मामलों में जानबूझकर गलत जानकारी या घोषणा देने वालों के खिलाफ जांच के बाद कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। वहीं, कांग्रेस ने इस मामले में व्यापक जांच की मांग की है और आरोप लगाया है कि मतदाताओं का डेटा जुटाने तथा फॉर्म तैयार करने में अन्य लोग भी शामिल हो सकते हैं। दूसरी ओर, भाजपा ने पार्टी स्तर पर मतदाता सूची से नाम हटाने के अभियान के आरोपों को खारिज किया है।
