राहुल गांधी ने 31 अक्टूबर को रैली का नक्शा साझा करते हुए लिखा, ‘कल मिलते हैं, साथ चलते हैं।’ उनके द्वारा साझा किए गए कार्यक्रम के अनुसार, रैली का मार्ग कनॉट प्लेस से शुरू होकर मिंटो रोड जंक्शन और अजमेरी गेट होते हुए रामलीला मैदान तक पहुंचेगा। इंडिया गठबंधन की इस रैली में हजारों लोगों के शामिल होने की उम्मीद जताई जा रही है।
इस आयोजन को लेकर दिल्ली में तैयारियां भी तेज कर दी गई हैं। शुक्रवार को हुई बारिश के कारण रामलीला मैदान में पानी भर गया था, जिससे आयोजन की तैयारियों को लेकर अतिरिक्त काम करना पड़ा। हालांकि, शनिवार को मैदान में पानी निकालने और अन्य व्यवस्थाओं को दुरुस्त करने का काम किया गया। आयोजकों की ओर से मैदान को रैली के लिए तैयार करने की प्रक्रिया जारी रही।
महारैली को लेकर जहां विपक्षी गठबंधन के नेता और कार्यकर्ता जुटने की तैयारी कर रहे हैं, वहीं दिल्ली के व्यापारिक संगठनों ने इस आयोजन के समय पर सवाल उठाए हैं। चैंबर ऑफ ट्रेड एंड इंडस्ट्री (सीटीआई) ने राहुल गांधी से एक बार फिर रैली रद्द करने की अपील की है। संगठन का कहना है कि दीपावली के प्रमुख कारोबारी समय में बड़े आयोजन और उससे जुड़ी व्यवस्थाओं के कारण बाजारों में व्यापार प्रभावित हो सकता है।
सीटीआई ने अपनी अपील में राहुल गांधी के ‘नफरत के बाजार में मोहब्बत की दुकान’ वाले संदेश का उल्लेख किया। संगठन का कहना है कि दिल्ली के व्यापारियों की दुकानें भी ग्राहकों के साथ आपसी विश्वास, प्रेम और सहयोग के आधार पर चलती हैं। ऐसे में दीपावली के व्यस्त कारोबारी मौसम में बाजारों और दुकानों का कारोबार प्रभावित नहीं होना चाहिए।
सीटीआई के चेयरमैन बृजेश गोयल ने कहा कि राहुल गांधी भारत जोड़ो यात्रा के दौरान मोहब्बत की दुकान का संदेश देते रहे हैं, लेकिन दिल्ली में रैली के आयोजन से पुरानी व्यापारिक दुकानों के सामने परेशानी खड़ी हो सकती है। उनके मुताबिक, चांदनी चौक और आसपास के बाजारों में कई दुकानें पीढ़ियों से कारोबार कर रही हैं। इन बाजारों का व्यापार केवल दुकानदारों तक सीमित नहीं है, बल्कि बड़ी संख्या में परिवारों की आजीविका भी इससे जुड़ी हुई है।
बृजेश गोयल ने कहा कि दिल्ली के चांदनी चौक की परांठे वाली दुकानें, खारी बावली के मसालों का कारोबार, सदर बाजार की चूड़ी और बिंदी की दुकानें तथा चांदनी चौक के लहंगे के बाजार की अपनी अलग पहचान है। इसी तरह दरियागंज में एसी का कारोबार, चावड़ी बाजार में सैनिटरी सामान की दुकानें और करोल बाग की मशहूर कुल्फी की दुकानें भी दिल्ली के व्यापारिक बाजारों का हिस्सा हैं।
उन्होंने कहा कि इन दुकानों से जुड़े प्रत्येक कारोबार पर करीब 10 से 20 लोगों के परिवारों की आजीविका निर्भर करती है। ऐसे में दीपावली जैसे बड़े त्योहार के ठीक पहले व्यापारिक गतिविधियों में बाधा आने से दुकानदारों और उनसे जुड़े लोगों को नुकसान हो सकता है। व्यापारियों की चिंता है कि रैली के कारण बाजारों तक ग्राहकों की आवाजाही प्रभावित हुई तो त्योहार के दौरान होने वाली बिक्री पर असर पड़ सकता है।
सीटीआई ने राहुल गांधी से अपील की है कि वे व्यापारियों की समस्याओं को ध्यान में रखते हुए महारैली आयोजित करने के फैसले पर दोबारा विचार करें। संगठन का कहना है कि राजनीतिक कार्यक्रमों के साथ-साथ उन व्यापारियों के हितों का भी ध्यान रखा जाना चाहिए, जिनके लिए दीपावली का समय पूरे साल के कारोबार में महत्वपूर्ण होता है।
फिलहाल 1 नवंबर को होने वाली महारैली को लेकर राजनीतिक तैयारियों के साथ व्यापारिक संगठनों की आपत्तियां भी सामने आ रही हैं। एक तरफ राहुल गांधी ने रैली में अधिक से अधिक लोगों के शामिल होने का आह्वान किया है, वहीं दूसरी तरफ व्यापारियों ने त्योहार के मौसम में बाजारों पर पड़ने वाले संभावित प्रभाव को लेकर अपनी चिंता जाहिर की है। अब इस आयोजन के दौरान रैली के मार्ग और आसपास के बाजारों में कारोबार की स्थिति पर भी नजर रहेगी।
